मार्ग दुर्घटना में घायल मजदूर की जिंदगी पर सरकारी बदइंतजामी भारी पड़ गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर समय से प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका तो वहीं 108 नंबर एंबुलेंस सेवा के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इलाज में देरी से मजदूर की जान चली गई। मौत के बाद लोग सरकारी व्यवस्था को कोस रहे थे। लोगों का कहना था कि यदि एंबुलेंस की सुविधा समय से मिल गई होती तो शायद जान बच सकती थी।
नगर के हतवा वार्ड नंबर तीन निवासी राम लखन 22 पुत्र रामा दैनिक मजदूर था। वह पड़ोसी की बाइक लेकर बाजार में गया था। शाम को बाजार से वाईपास रोड होकर घर जा रहा था। अभी वह पिवकोल मोड से पूरब 150 मीटर दूरी पर पहुंचा था कि सामने से आ रही चार पहिया गाड़ी ने टक्कर मार दी। ठोकर लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा।
अगल बगल के लोगों ने उसे उठाया और पीएचसी पर ले गए। पीएचसी पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। काफी देर तक इंतजार के बाद डॉक्टर नहीं आए तो फार्मासिस्ट ने एक इंजेक्शन लगाकर देवरिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध न होने से लोग इंतजार करने लगे। काफी देर बाद एंबुलेंस का इंतजाम हो पाया। उसके बाद उसे देवरिया जिला अस्पताल ले जाया गया।
रास्ते में उसकी हालत बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने जहां करीब 7.30 बजे दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी में डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की खबर जैसे ही परिवारवालों को मिली,चीख पुकार मच गई। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि वह विभागीय कार्य से जेडी कार्यालय आए हैं। दूसरे डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई थी। मौके पर उनकी मौजूदगी नहीं होने के बारे में पता किया जाएगा।