देवरिया। गोविंदपुर गांव में मूक बधिर आशीष मणि त्रिपाठी हत्याकांड का पर्दाफाश हो गया है। कातिल मूक बधिर की जगह उसके भाई की हत्या करना चाहता था। घटना की वजह जमीन और नौकरी के लिए रुपये का विवाद बताया जा रहा है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए थे।
एसपी प्रभाकर चौधरी ने पुलिस लाइंस में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि छह नवंबर 2015 की रात कोतवाली के गोविंदपुर निवासी मूक बधिर आशीष मणि पुत्र गौरीशंकर की हत्या कर दी गई थी। वह घर से बाहर घोठे पर सो रहा था। आशीष के भाई शिवाकांत की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर लिया।
कई बिंदुओं पर पड़ताल की गई कई लोगों से पूछताछ हुई लेकिन खुलासा नहीं हुआ। कुछ दिन पहले शराब के नशे में आरोपी युवक ने अपने दोस्तों को घटना के बारे में जानकारी दी। पुलिस ने जब आरोपी के बारे में पड़ताल शुरू की तो पता चला कि घटना के दो दिन बाद वह बाहर चला गया। किसी को उस पर शक नहीं हो रहा था। कुछ दिन बाद वह घर लौटा। उसकी गिरफ्तारी के लिए सीओ सुशील सिंह के नेतृत्व में शहर कोतवाल अनिल पांडेय, उप निरीक्षक मिथिलेश को लगा दिया गया था।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शुक्रवार की सुबह छह बजे के करीब औराचौरी के पास से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान गोविंदपुर गांव निवासी पंकज मणि उर्फ विक्की मणि पुत्र रविन्द्र के रुप में हुई। उसके पास से एक पिस्टल भी बरामद हुआ। पूछताछ में उसने आशीष की हत्या की बात को स्वीकार की। एसपी ने बताया कि आरोपी विक्की ने बताया कि करीब आठ वर्ष पहले मूक बधिर के भाई शिवाकांत ने एक जमीन को बैनामा कराया था। साथ ही अस्पताल में नौकरी के नाम पर 40 हजार रुपये ले लिया।
यहीं नहीं शिवाकांत ने गांव में एक चारदीवार चलाई जिससे उसके खेत का रास्ता बंद हो गया। कमजोर होने के कारण विक्की विरोध नहीं कर पा रहा था। उसने शिवाकांत की हत्या की योजन घोठे पर बनाई। लेकिन संयोग से मूक बधिर आशीष वहां जोकर सो गया। एक गोली मारने के बाद आरोपी भाग गया। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।