गोवंशीय पशुओं की तस्करी करने का देवरिया के रास्ते बिहार जाने का कोई नया मामला नहीं है। गोरखपुर रेंज में होने वाली गोवंशीय पशुओं की तस्करी का रूट तत्कालीन आईजी अमिताभ यश ने जो तैयार कराया था, उसमें देवरिया के दो रूट शामिल थे। उन्होंने इन रूटों से जुड़े थानेदारों को गश्त बढ़ाने और तस्करी रोकने के लिए भी निर्देश दिया था। लेकिन थानेदार इसे गंभीरता से नहीं लिए और तस्करी बदस्तूर जारी रही।
तीन दिन पूर्व मईल थाना क्षेत्र के कुंडौली मोड़ पर गायों से भरी तस्करों की पिकअप पलटने के बाद बरहज, मईल और लार पुलिस की मिलीभगत से हो रही तस्करी को भंडाफोड़ हो गया। गोवंशीय पशुओं की तस्करी पर एसपी प्रभाकर चौधरी पर रोक लगाने के लिए सभी थानेदारों को निर्देश दिए थे और मेहरौना बार्डर चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई भी की थी। एसपी की लाख कड़ाई के बाद भी तस्करों से सांठगांठ रखने वाले पुलिसकर्मी तस्करी कराने से बाज नहीं आए।
तस्करों के बरामद हुए मोबाइल के जरिए एसपी प्रभाकर चौधरी इस धंधे में संलिप्त पुलिस कर्मियों के साथ-साथ सफेदपोशों को भी ट्रेस करने में जुट गए हैं। मईल, लार और बरहज में तैनात तस्करों से ताल्लुकात रखने वाले सिपाहियों को कार्रवाई की चिंता सता रही है। करीब छह माह पूर्व गोरखपुर रेंज के जिस जिले के रास्ते पशुओं की तस्करी होती है। वह रूट चार्ट आईजी ने जारी कर सभी थानेदारों और पुलिस कप्तान को इन रूटों पर गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया था।
आईजी के रूट चार्ट में गोरखपुर बड़हलगंज से रामजानकी मार्ग होते हुए बरहज, मईल और लार थाना के मेहरौना बार्डर से बिहार के सिवान जिले में और दूसरा रूट गौरीबाजार के रास्ते देवरिया सदर और रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के रास्ते बिहार, गोपालगंज तस्करों को गोवंशीय पशु लेकर जाने की बात कही गई थी। इस रूट के सभी थानेदारों को सक्रियता बरतने और क्रास चेकिंग पर सस्पेंड करने की बात कही गई थी। लेकिन इसका पालन तेज तर्रार एसपी प्रभाकर चौधरी जिले में नहीं करा सके।