देवरिया। बालिका गृह कांड में मुख्य आरोपी संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी और मोहन त्रिपाठी पर जालसाजी और बाल अधिकारों के उल्लंघन सहित कई अन्य धाराएं भी बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को एसआईटी के प्रार्थना पत्र पर पाक्सो कोर्ट ने देर शाम यह आदेश दिया। उधर, आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने के प्रार्थना पत्र पर फैसले को कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है। शनिवार को इस पर फैसला आएगा।
पाक्सो कोर्ट में एसआईटी ने दो प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। एक प्रार्थना पत्र आरोपियों के विरुद्ध पंजीकृत केस में धाराओं में वृद्धि से जुड़ा था। एसआईटी ने अपने पक्ष में कहा कि विवेचना के दौरान इस मामले में कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। इसके आधार पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, जालसाजी, बाल अधिकार व जेजे एक्ट का उल्लंघन होना स्पष्ट हो रहा है। लिहाजा मुकदमे में इन धाराओं को शामिल करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। दूसरी अर्जी में तीनों आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट की मांग की गई थी। सुनवाई के बाद जज पीके शर्मा ने फैसला सुरक्षित रख लिया। देर शाम धाराओं के वृद्धि संबंधित प्रार्थना पत्र को मंजूर कर लिया, जबकि लाई डिटेक्टर टेस्ट की अपील पर शनिवार को सुनवाई की तिथि नियत की। कोर्ट में बहस के दौरान गिरिजा, मोहन और कंचन भी मौजूद रहीं।
मोहन की जमानत पर सुनवाई छह को
देवरिया। बालिका गृह कांड में आरोपी मोहन त्रिपाठी की जमानत अर्जी पर सुनवाई अब छह अक्तूबर को होगी। इस मामले में शुक्रवार की तिथि निर्धारित थी। पाक्सो कोर्ट के जज पीके शर्मा ने छह सितंबर की अगली तिथि तक के लिए सुनवाई टाल दी।