देवरिया। ईयरफोन लगाकर बात करते हुए चकियवां ढाला पार कर रहा युवक ट्रेन की चपेट में आ गया। उसे बायां हाथ गंवाना पड़ा। उसके चिल्लाने पर आस पास के लोगों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
चकियवां मोहल्ले के हरवंश का 30 वर्षीय बेटा गंगाधर टेंपो चालक है। रोज की भांति सोमवार की शाम को वह टेंपो लेकर घर लौटा। रात आठ बजे ईयरफोन लगाकर किसी से बात करते हुए चकियवां ढाले पर रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। इसी दौरान भटनी की तरफ से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गया। इससे उसका बांया हाथ कट गया। वह गिरकर चिल्लाने लगा। आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे और उसे जिला अस्पताल भिजवाया। चिकित्सकों ने उसका तत्काल उपचार किया और गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के नाक, कान, गला रोग के डॉक्टर एनके पांडेय का कहना है कि ईयरफोन के लगातार प्रयोग से सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसीबेल तक कम हो जाती है। कान का पर्दा वाइब्रेट होने लगता है। दूर की आवाज सुनने में परेशानी होने लगती है। यहां तक कि इससे बहरापन भी हो सकता है। ऐसे में वाहन चलाते वक्त ईयरफोन करने से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। जिले के ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर रामवृक्ष यादव आए दिन ईयरफोन लगाकर दो पहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाते हैं। अब तक सैकड़ों ईयरफोन जब्त भी कर चुके हैं। इसके बावजूद युवाओं से ईयरफोन का जुनून समाप्त नहीं हो रहा है। एसपी राजीव मल्होत्रा के स्थानांतरण के बाद यह अभियान ठप सा पड़ गया है। ऐसे में युवाओं को ईयरफोन लगाकर वाहन चलाते कभी भी देखा जा सकता है।