देवरिया। बरहज मार्ग पर बैरौना के पास हुए हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। सुबह लोगों की नींद खुली तो पहली खबर छह मौत की पाकर लोग सन्न रह गए। तत्काल लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल था। हादसे ने किसी का सुहाग मिटा दिया तो किसी के सिर से पिता का साया छीन लिया। पोस्टमार्टम हाउस पर जुटे लोगों की जुबां पर मृतकों के साथ बिताए गए अंतिम पलों की चर्चा थी। मरने वालों से किसी की कुछ घंटे पहले भेंट हुई थी तो किसी से शीघ्र लौटने की बात कह वह बहोर गांव के लिए निकले थे। एक झटके में उनके मौत के आगोश में चले जाने पर किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था। मोर्चरी में रखे शव को देखकर उनकी आंखें छलक आ रही थी तो फड़फड़ाते होंठ अंदर की पीड़ा कहने के लिए काफी थे। परिवार के लोगों पर पड़ी विपत्ति में शुभ चिंतक खड़े हुए हैं। गांव और पड़ोस के लोग परिवारवालों को समझाने में लगे रहे।
रोजगार से अच्छी कमाई करते थे ओमप्रकाश
दानोपुर गांव निवासी रामायन यादव की तीन संतानों में ओमप्रकाश यादव छोटे थे। मझले भाई सुभाष की बीमारी से मौत हो चुकी है। ओमप्रकाश जेल के पास धर्मकांटा के अलावा वह कई अन्य कारोबार भी करते थे। धर्मकांटा कर्मचारी रामबली के घर से लौटते समय वह हादसे का शिकार हो गए। पत्नी नरमा देवी, बेटी काजल और बेटे आकाश, आदित्य को जानकारी मिली तो रो-रोकर बुरा हाल हो गया। ओमप्रकाश काफी मिलनसार थे। उनके शुभचिंतकों की भीड़ पोस्टमार्टम हाउस पर लगी रही।
बीटीसी की पढ़ाई कर रहा था राकेश
दानोपुर गांव निवासी राकेश यादव 22 कुशीनगर जिले के हाटा में बीटीसी का छात्र था। मृतक ओमप्रकाश के सबसे बड़े भाई विद्यासागर की दो संतानों में राकेश छोटा था। बड़े भाई दीपक यादव दिल्ली में किसी निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। कार राकेश ही चला रहे थे। उन्हें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। अनियंत्रित होकर वह खड़े ट्रक में कार घुस गई। बेटे की मौत की जानकारी मिलने पर मां इसरावती देवी और बहन वंदना का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। एक ही परिवार में दौ मौत से गांव के लोग दुखी हैं।
निजी कंपनी में कार्य करते थे संतोष
गोरखपुर के शाहपुर के नंदानगर निवासी एयरफोर्स से रिटायर नागेंद्र प्रताप सिंह के दो बेटों में संतोष बड़े थे। वह देवरिया में किसी निजी कंपनी में काम करते थे। छोटे सतीश सिंह एयरफोर्स में हैं। गुरुवार की रात हुए हादसे में कार में आगे बैठे संतोष की भी मौत हो गई। रात में ही सूचना जब परिवारवालों को मिली तो वे परेशान हो गए। परिवारवाले और रिश्तेदार शुक्रवार को पोस्टमार्टम पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग शव लेकर गोरखपुर गए। वहां राप्ती नदी के राजघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बीएड का छात्र था शशांक
बस्ती जिले के प्रभुनाथनगर, वाल्टरगंज के मूल निवासी भोलानाथ मणि जिला जेल में हेड वार्डन हैं। जिला जेल की कॉलोनी में वह परिवार सहित रहते हैं। बड़ा बेटा दिशांक परिषदीय शिक्षक हैं। दूसरे नंबर का शशांक मणि बीएड की पढ़ाई करता था। सबसे छोटा प्रशांत बस्ती में पॉलीटेक्निक की पढ़ाई करता है। दोस्तों संग शशांक मणि भी चले गए थे। बैरौना में हुए हादसे में उनकी भी मौत हो गई। सूचना पर परिवारवालों के साथ ही जेल के कुछ बंदीरक्षक भी पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवारवालों को सौंप दिया गया।
बेटी की शादी के सिलसिले में घर आए थे अनिल
सदर कोतवाली के कठिनइयां गांव निवासी अनिल श्रीवास्तव 52 की सात बेटियां और एक बेटा है। चार बेटियों की शादी कर चुके थे। दिल्ली में रह निजी कंपनी में नौकरी करने वाले अनिल 13 मई को पांचवीं बेटी की शादी के सिलसिले में गांव आए थे। बिहार के गोपालगंज में वह लड़का देखने गए थे। गुरुवार की रात को वह भी ओमप्रकाश यादव के साथ गए थे। उनके मौत की सूचना परिवारवालों को मिली तो रो-रोकर बुरा हाल हो गया। छोटे भाई अरुण लाल श्रीवास्तव पोस्टमार्टम पर मौजूद रहे।
धर्मकांटे पर काम करता था अच्छेलाल
बिहार के सिवान जिले के आंदर थानाक्षेत्र के गड़ार गांव निवासी अच्छेलाल 52 ओमप्रकाश यादव के धर्मकांटा पर 25 साल से कर्मचारी था। मालिक के साथ वह कार में सवार होकर साथी कर्मचारी के घर गया। हादसे में मौत की खबर सुनकर परिवारवाले देवरिया आए। मृतक अच्छेलाल के दो बेटे और एक बेटी हैं। परिवारवालों ने बताया कि उन्हें क्या पता था कि जहां इतने लंबे समय से काम कर रहे हैं, वहां से शव लेकर जाना पड़ेगा। देर शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव को लेकर परिवारवाले गांव चले गए।