देवरिया। पुरवा के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित बंद पड़ी अटैची फैक्ट्री में दोपहर करीब साढ़े 11 बजे आग लग गई। प्लास्टिक से जुड़े सामान व कच्चा माल होने के कारण चंद मिनटों में ही आग ने विकराल रुप धारण कर लिया। देखते ही देखते पूरा आसमान धुएं के गुबार से भर गया। जलते हुए प्लास्टिक के दाने, अटैची, मोबिल व अन्य सामानों से उठते धुएं में लोगों को सांस लेने में असहज महसूस हो रहा था। करीब पांच घंटे तक आग बुझाने के लिए मशक्कत होती रही। इस बीच चारों तरफ अफरातफरी की स्थिति रही। आग पूरी तरह बुझने तक लोग दहशत से घिरे रहे।
प्रत्यक्षदर्शी व औद्योगिक क्षेत्र निवासी सौरभ कुमार के मुताबिक करीब साढ़े 11 बजे फैक्ट्री के पिछले हिस्से की बाउंड्रीवाल से लगे पॉवर हाउस की तरफ ओर से आग की शुरुआत हुई। लोग कुछ समझ पाते तब तक तेज धुंआ और लपटें निकलनी शुरू हो गईं। इसके बाद तो बस अफरातफरी शुरू हो गई। पड़ोस की फैक्ट्रियों से भी लोग बाहर निकल गए। कुछ लोगों ने अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन तेज धमाके के कारण सहम गए। फैक्ट्री में गैस सिलेंडर, मोबिल व अन्य सामान भी थे, ऐसे में हर कोई बड़े हादसे की आशंका में सहमा रहा। अटैची फैक्ट्री के सामने त्रिलोक राव का निवास है। घटना के तुरंत बाद वह मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि आग कैसे लगी, कोई समझ ही नहीं पाया। पिछले हिस्से से लपटें उठनी शुरू हुई थी, जो कुछ ही देर में भीषण आग में तब्दील हो गई। टिनशेड और पक्की दीवार भी टूटकर गिर रही थीं। करीब पौन घंटे बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची और पॉवर हाउस की तरफ से आग बुझानी शुरू की, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं होने से बमुश्किल 10 मिनट में ही टैंक खाली हो गया। दूसरी गाड़ी करीब एक घंटे बाद पहुंची। आशीष कुमार, विजय जोशी आदि ने भी आग बुझाने के इंतजामों पर असंतोष जताया।
फैक्ट्री के अंदर मौजूद था मेवाती का परिवार
देवरिया। हे भगवान, कहां से ई बीपत आ गइल। हमहन त कुछ नाहीं निकाल पइली जा। कपड़ा-लत्ता सब जर गइल। एक्के देहिएं भर कपड़ा बचल। बस ऐतने बा कि बच्चा लोग बच गइलन। जिंदगी रही त फिर सब हो जाई...। कुछ ऐसे ही अल्फाज थे मेवाती देवी की। औद्योगिक क्षेत्र पुरवा की जिस अटैची फैक्ट्री में आग लगी थी, मेवाती उसी परिसर में रहकर देखभाल करती थीं। उसके साथ एक विवाहित बेटी और दो छोटे बच्चे भी रहते हैं। घटना के वक्त सभी फैक्ट्री के अगले हिस्से में मौजूद थे। आग लगने का शोर हुआ तो सब भागने लगे। आग फैलने से पहले ही सबको सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। प्रचंड लपटों में घिरी फैक्ट्री को धू-धूकर जलता देख मेवाती देवी रोने लगीं। उसे सब कुछ जलने का दुख था तो इस बात का सुकून भी कि कोई जनहानि नहीं हुई।
बकौल, मेवाती देवी करीब साढ़े 11 बजे फैक्ट्री के पिछले हिस्से से तेज धुंआ उठना शुरू हुआ तो आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाना शुरू किया। तभी उसकी भी नजर आग की ओर पड़ी। सब कुछ भूलकर वह बेटी और उसके बच्चों को साथ लेते हुए बाहर की ओर भागीं। इसके बाद अंदर रखे सामानों को एक-एक कर बाहर निकालने का प्रयास शुरू हुआ। पड़ोस की दूसरी फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर व अन्य लोग भी बचाव कार्य में जुट गए। तत्काल सूचना प्लाट के स्वामी दामोदर सिंह को दी गई। मेवाती को उन्होंने ही देखभाल के लिए यहां रखा था। बताते हैं कि यह प्लाट दामोदर सिंह के नाम से आवंटित है। इस पर मनीष रूंगटा अटैची बनाने की फैक्ट्री संचालित करते हैं। देवरिया के प्रतापपुर क्षेत्र के निवासी दामोदर सिंह लखनऊ में आवास बनाकर रहते हैं। यहां महीने में एक-दो बार उनका आगमन होता था। फैक्ट्री के ही अगले हिस्से में उन्होंने अपना आवास बना रखा था। आग में वहां रखा बिस्तर, कपड़ा, फ्रिज, आलमारी सहित सब कुछ नष्ट हो गया।
बिजली बकाए में छह माह से बंद थी फैक्ट्री
देवरिया। पुरवा स्थित जिस अटैची फैक्ट्री में आग लगी, वह करीब छह माह पहले ही बंद हो गई थी। बिजली निगम की गोरखपुर से आई विजिलेंस टीम ने मनीष रूंगटा की फैक्ट्री पर छापा मारा था। यहां स्वीकृत क्षमता से अधिक लोड पाया गया था। इस पर कनेक्शन काटते हुए विजिलेंस टीम ने करीब 1.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। तब से यह फैक्ट्री बंद चल रही थी। लोगों की मानें तो चालू फैक्ट्री में रोजाना 30 से 35 वर्कर काम करते थे। बंद होने के बाद सिर्फ तैयार माल व स्क्रैप ही रखा जाता था। देखभाल के लिए कुछ लोग रहते थे। अगर चालू फैक्ट्री में आग लगी होती तो हादसे की भयावहता बढ़ सकती थी।