देवरिया। बाइक चलाने में सुरक्षा मानकों की अनदेखी में कई जानें जा चुकी हैं। किसी ने बेटा खोया, किसी ने पति, किसी ने पिता तो किसी ने भाई खो दिया। परिवार के लोग अब भी गम में हैं। हादसे में जान गंवाने वालों में कोई इंजीनियर बनना चाहता था तो कोई परिवार का सहारा था। किसी की शादी होने वाली थी तो कोई अपना कारोबार संभालना चाहता था। पूछने पर परिवार वालों की आंखें भर आईं। कहा, एक गलती ने सब कुछ खत्म कर दिया। अब बची हैं कुछ पुरानी यादें और अपने को खोने का गम।
इंजीनियर बनना चाहता था बेटा
पथरदेवा के नंदू मद्देशिया का 15 वर्षीय बेटा भूषण तीन साल पहले एक दोस्त के साथ बाइक से धुसवां चौराहे पर जा रहा था। दोनों हेलमेट नहीं लगाए थे। छितौनी गांव के पास बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। इस घटना में दोनों की मौत हो गई। घटना के बारे में पूछे जाने पर मां गायत्री देवी और पिता नंदू मद्देशिया रोने लगे। कहा, बेटा होनहार था। इंजीनियर बनने का सपना देख रहा था। भूजा बेचकर बेटे को पढ़ाता था। सोचा था कि बेटा पढ़-लिखकर कुछ बन जाएगा तो कष्ट दूर हो जाएंगे, लेकिन वह तो जीवन भर का दर्द देकर चला गया।
पता नहीं था मौत इंतजार कर रही है
पिछले साल दो नवंबर की शाम की बात है। मुझे क्या पता था कि मौत उनका इंतजार कर रही है। वरना हम जाने ही नहीं देते। दुकान से घर भोजन करने आए थे। थोड़ी दूरी होने की वजह से उन्होंने हेलमेट नहीं लगाया था। घर से निकले कुछ समय ही हुआ था, मैं बच्चों के लिए खाना बना रही थी तबी मौत की खबर आ गई। बहादुरपुर के जीतन विश्वकर्मा की मुसैला चौराहे पर इलेक्ट्रिक की दुकान थी। पत्नी बासकी देवी के मुताबिक उसी से परिवार की जीविका चलती थी। दो लड़के सत्यप्रकाश 12 और आदित्य नौ और बेटी तनु 10 वर्ष की है। उनके जाने के बाद उनकी पत्नी मेहनत मजदूरी कर बच्चों का भरण-पोषण कर रही हैं।
शादी से पूर्व दीपक समा गया मौत के मुंह में
घर पर भोजन बनत रहे। हमनी के जानी जा कि बाबू गांव में घुमत होइहे। तबले मौत क सूचना आ गइल। बाबू छठ में घरे आइल रहन। उनके शादी तय करे खातिर देखनहरु आवेके रहन। तवले बाबू हमार दुनिया छोड़ के चल गइन। यह कहते हुए दीपक की मां गायत्री देवी की आंखें भर आईं। बहादुरपुर गांव की गायत्री देवी के परिवार में सबसे छोटा होने के कारण दीपक बहुत दुलारा था। घटना के दस दिन पूर्व ही वह बाहर से घर आया था। पड़ोस के रहने वाले जीतन विश्वकर्मा के साथ बाइक से सवार होकर मुसैला चौराहे पर जा रहा था। सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। दीपक हेलमेट नहीं पहना था।
हेलमेट रहता तो बच गई होती जान
घटना में घायल सूरज सिंह का कहना है कि बाइक पर तीन लोग बैठे थे। खुखुंदू, मुसैला पेट्रोल पंप के पास पहुंचते ही बाइक अनियंत्रित होकर बैलगाड़ी से टकरा गई। इसके बाद बाइक सामने से आ रहे ट्रक की चपेट में आ गई। मैं छिटककर दूर चला गया और बेहोश हो गया। चार दिन बाद होश में आया तो कुछ याद नहीं था। घरवालों ने बताया कि बाइक पर साथ बैठे दो दलोगों की मौके पर ही मौत हो गई। अब लगता है अगर सभी ने हेलमेट पहना होता तो उनकी जान बच गई होती।
बेटे को व्यवसाय में लाना चाहता था
बघौचघाट के मलसी गांव के रहने वाले व्यवसायी शादिक अली का 16 वर्षीय बेटा जहांगीर शेख ने चार साल पहले हाईस्कूल की परीक्षा दिया था। किसी काम से वह बाइक से जैदपट्टी चौराहे पर गया था। पास का चौराहा होने के चलते वह हेलमेट नहीं लगाया था। जैदपट्टी चौराहे पर बाइक ट्रक से टकरा गई। मौके पर ही जहांगीर की मौत हो गई। पिता शादिक बेटे को व्यवसायी बनाना चाहते थे। बेटे की असमय मौत से गहरा आघात लगा था। मां नूरतारा खातून भी बेटे की मौत से गमजदा रहने लगीं।
7561 वाहनों का हुआ चालान
पिछले साल पुलिस ने जिलेभर में चेकिंग अभियान चलाया था। नवंबर महीने में यातायात माह चला। इसमें सभी थानाक्षेत्र से 7561 वाहनों का चालान किया गया था। इनसे करीब चार लाख रुपये से अधिक की वसूली गई। इस साल जनवरी महीने में 600 से अधिक वाहनों का चालान किया गया है। फरवरी महीने में यह आंकड़ा अभी 150 से अधिक हो गया है। इन वाहन स्वामियों से 50 हजार से अधिक धनराशि जुर्माना के रूप में वसूल की गई है।