देवरिया। बैतालपुर तेल डिपो से चोरी के खेल में खाकी भी दागदार हो चुकी है। चोरी के तेल टैंकर को बिना इजाजत छोड़ देने के आरोप में दो थानेदारों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। इस खेल का मास्टरमाइंड आईओसी का तत्कालीन डिपो प्रबंधक रामू राव था। उसके ऊपर भी कार्रवाई हो चुकी है। गौरीबाजार थाने में दर्ज मुकदमे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि खाकी से संरक्षण के बिना धंधेबाज सफल नहीं हो सकता। सूत्रों का दावा है कि बैतालपुर डिपो से चोरी होने वाले तेल के कारोबारी पांच लाख रुपये प्रतिमाह पुलिस को देते हैं। वसूल की गई रकम कई हिस्से में बंटती है। बैतालपुर चौकी से लेकर गोरखपुर तक हिस्सा पहुंचता है। यही वजह है बड़े गेट वालों पर कार्रवाई करने से पुलिस बचती है। अक्टूबर-2012 में तत्कालीन डीएम रविकांत सिंह, एसपी एल रवि कुमार ने तेल माफिया के खिलाफ संयुक्त रूप से छापेमारी की थी। दबिश के दौरान बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने गौरीबाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। छापेमारी में चोरी के तेल से भरे आठ टैंकर पकड़े गए थे। इस मामले में 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। गौरीबाजार पुलिस की सुपुर्द में सील सभी आठ टैंकर हो गए थे। मामले की जांच चल रही है। इसी दौरान तत्कालीन डिपो प्रबंधक रामू राव ने कुछ तेल माफिया की मदद से गौरीबाजार पुलिस से सभी टैंकरों को छोड़ने का प्रस्ताव रखा। तत्कालीन थानेदार वीरेंद्र यादव से साठगांठ हुई और जांच की दिशा गलत दिशा में चली गई। जबकि तत्कालीन एसओ हरेंद्र मिश्र और बैतालपुर तेल डिपो के प्रबंधक की मिली भगत से न्यायालय की अनुमति के बगैर ही सभी तेल टैंकरों को थाने से छोड़ दिए गए। जानकारी होने पर डीएम ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्कालीन एसओ हरेंद्र मिश्र, पूर्व एसओ वीरेंद्र यादव और बैतालपुर तेल डिपो के प्रबंधक रामू राव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। सूत्रों का कहना है कि मामला विभागीय होने के कारण पुलिस महकमे के लोगों ने आपूर्ति अधिकारी से मिलकर जांच को प्रभावित कर दिया। मुकदमे में एफआर की नौबत आ गई है। हालांकि कोर्ट ने केस को स्वीकार नहीं किया।
इनसेट
रुपये में थानेदार भुल गए जिम्मेदारी
तेल चोरी की काली कमाई से कई थानेदार बन गए। दामन पर दाग लगते रहे, लेकिन जिम्मेदार जिम्मेदारी ही भूल गए। जिन 32 लोगों के ऊपर डीएम रविकांत सिंह ने केस दर्ज कराया, वह पुलिस के खास हो गए। किसी भी तेल माफिया के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई नहीं की। सुनियोजित तरीके से तेल माफिया की गैंग चलाने वाले बदमाश पुलिस संरक्षण में पलते रहे। योगी सरकार बनने के बाद बदमाशों की गैंग बननी शुरू हुई। लेकिन तेल माफिया का जिक्र करना देवरिया पुलिस ने मुनासिब नहीं समझा। आलम यह है कि डीसीआरबी में कोई भी तेल माफिया रजिस्टर्ड नहीं है। सवाल उठता है कि माफिया बनाने के लिए पुलिस को किन अपराध की जरूरत पड़ेगी।
कार्रवाई की बजाए खामोश पुलिस
तेल चोरी के खेल में पुलिस कार्रवाई की बजाए बैकफुट होना बेहतर समझ रही है। सूत्रों का दावा अगर छापेमारी हुई तो सबसे आर्थिक नुकसान पुलिस महकमे को होगा। यही वजह है कि मामला प्रशासनिक बताकर जिम्मेदार पल्ला झाड़ना बेहतर समझ रहे हैं। जिला प्रशासन, आपूर्ति विभाग को भी नुकसान का डर सता रहा है। मंथन में ही अधिकारी उलझ कर रह गए हैं।
पुलिस ने फुटेज की नहीं की जांच
डिपो के अंदर मारपीट के मामले में गौरीबाजार पुलिस लापरवाही बरत रही है। मंगलवार को डिपो के अंदर कुछ लोगों ने पेट्रोल पंप के सेल्समैन की पिटाई कर दी थी। पूरी घटना डिपो के अंदर सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हो गई। नामजद के अलावा मारपीट करने वालों की आसानी से पहचान की जा सकती है। विवाद के बाद कुछ असलहाधारी भी डिपो के अंदर पहुंचे थे। उन्होंने डिपो प्रबंधक को भी धमकी दिया था। पुलिस अगर वीडियो फुटेज खंगालती तो मनबढ़ सलाखों के पीछे होते। हालांकि पूरे प्रकरण को पुलिस दबाने में जुटी है।