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सीबीआई के शिकंजा कसने से जिले के बालू कारोबारी भी बेचैन

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सीबीआई के शिकंजा कसने से बालू कारोबारी बेचैन
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नियम विरुद्ध खनन के मामले में देवरिया भी है सीबीआई के रडार पर
दो बार जिले में आकर रिकॉर्ड खंगाल चुकी है सीबीआई की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सत्ता की हनक में सफेदपोश और अफसरों की मिलीभगत से बालू खनन का अवैध खेल देवरिया में भी खूब खेला गया है। इस खेल ने कइयों को मालामाल कर दिया। अब सूबे के कई जिलों में खनन माफिया पर सीबीआई का शिकंजा कसने के बाद इनकी बेचैनी भी बढ़ गई है। अवैध खनन के जिन मामलों की पड़ताल में सीबीआई जुटी है, उनमें देवरिया का भी नाम शामिल है। एक वर्ष पहले सीबीआई टीम कई दिनों तक यहां डेरा डाल चुकी है। यहां के सारे रिकॉर्ड कब्जे में ले चुकी है। कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद कई पूर्व अफसरशाह भी इसकी चपेट में आएंगे।
वर्ष 2012 से 2016 तक अवैध तरीके से पट्टा कर खनन कराने के मामले में देवरिया भी सीबीआई के रडार पर है। आरोप है कि सत्ता पक्ष के इशारे पर कुछ सफेदपोश और अफसरों ने नियम विरुद्ध ढंग से पट्टा देकर खनन कराया। जांच की जद में आने के कारण ही यहां के अधिकांश घाटों पर खनन प्रतिबंधित है। वर्ष 2017 और 2018 में दो बार सीबीआई की टीम देवरिया आ चुकी है। रिकॉर्ड जब्त करते हुए टीम ने बालू घाटों का स्थलीय सत्यापन भी किया था। उस दौरान करीब 50 बालू ठेकेदार व पट्टाधारकों का बयान दर्ज किया गया था। इनमें बरहज के पूर्व ईओ, पूर्व चेयरमैन समेत कई दिग्गज शामिल रहे। जांच में पाया गया कि जिसके नाम से बालू खनन का पट्टा था, उन्हें पता तक नहीं था। खनन कराने वाले सभी प्रभावशाली लोग थे। अब सीबीआई ने हमीरपुर जिले में खनन कराने वाले अफसरों पर कार्रवाई शुरू की है तो देवरिया में खनन कराने वालों में भी खलबली मची है। कई पट्टाधारक खनन विभाग में जानकारी लेने पहुंच रहे हैं।
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खनन अधिकारी उमाकांत ने बताया कि जहां जांच पूरी हो चुकी है, वहां सीबीआई ने केस दर्ज कराकर कार्रवाई शुरू की है। देवरिया में भी टीम पिछले वर्ष आई थी। बीच में जरूरत पड़ने पर अभिलेख मुहैया कराया गया। देवरिया में भी कार्रवाई होगी, लेकिन अभी यहां सीबीआई नहीं पहुंची है।
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2012 से 2016 तक इनकी रही है तैनाती
बालू खनन की जांच जब से चल रही है तब से देवरिया में डीएम की कुर्सी पर डॉ. हृषिकेश भाष्कर यशोद, कुमार रविकांत सिंह, विवेक, मणि प्रसाद मिश्र, आरपी गोस्वामी, मणि प्रसाद मिश्र, शरद कुमार सिंह और अनीता श्रीवास्तव कार्यरत रहीं।
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