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मामा ने ही किया था भांजे का कत्ल

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भोलु हत्या कांड का एसपी ने खुलासा किया। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। पांच वर्ष पूर्व गौरीबाजार के लेड़हा गांव निवासी छह वर्षीय भोलू की हत्या का पर्दाफाश हो गया है। संपत्ति विवाद में मामा ने ही उसकी हत्या की थी। शव को मझना नाले के किनारे दफन कर दिया था। पुलिस ने आरोपी मामा शिवशंकर निषाद को मंगलवार को जेल भेज दिया है।
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पुलिस लाइंस के मनोरंजन सभागार में पत्रकार वार्ता में एसपी ने बताया कि गौरीबाजार थानाक्षेत्र के लेड़हा गांव स्थित ननिहाल में रह रहे छह वर्षीय भोलू की चार अगस्त 2013 को हत्या कर दी गई। आरोपी शिवशंकर निषाद ने बताया था कि भोलू को सर्प ने डंस लिया है। झांड-फूंक कराने के लिए वह गाजीपुर ले गया था। वहां से लाया और मझना नाले के किनारे शव को दफना दिया। भोलू की मां शारदा देवी ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। गौरीबाजार पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। विवेचना के दौरान शिवशंकर निषाद को आरोपी बनाया गया। पुलिस उसकी तलाश में थी, लेकिन उसका पता नहीं चल पा रहा था। 29 जुलाई को एसपी रोहन पी कनय ने गौरीबाजार पुलिस को घटना के पर्दाफाश का निर्देश दिया। गौरीबाजार के इंस्पेक्टर परमाशंकर यादव अपराधियों की तलाश में थे। उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि भोलू हत्याकांड का आरोपी घर पर मौजूद है। इंस्पेक्टर परमाशंकर यादव हमराहियों संग पहुंचे तो शिवशंकर निषाद भागने लगा। उसे दौड़ा कर पकड़ लिया गया। आरोपी शिवशंकर ने बताया कि बहन शारदा देवी अपने गांव अरईपार, रामपुर कारखाना की संपत्ति बेचकर उसके वहां रहती थी। मां जमीन का हिस्सा भांजे भोलू को देना चाहती थी। इसलिए उसने भोलू की गला दबाकर हत्या कर दी। मंगलवार को उसे न्यायालय के लिए चालान किया गया। वहां से वह जेल भेज दिया गया।

नहीं पसीजा था शिवशंकर का दिल
देवरिया। पांच साल तक पुलिस की आंख में धूल झोंक कर आजाद घूमता रहा शिवशंकर निषाद का दिल भोलू के मामा-मामा कहने पर भी नहीं पसीजा था। गला दबाकर भोलू को मार डाला और मामले को दूसरा मोड़ देने के लिए परिवारवालों को बताया कि उसे सांप ने डंस लिया है। अंतत: वह पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया।
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गौरीबाजार के लेड़हा गांव निवासी शिवशंकर की बहन शारदा के पति की दुर्घटना में मौत हो गई। उसके बाद शारदा देवी ने रामपुर कारखाना के अरईपार गांव में अपनी जमीन बेच दी। वह भी भाई शिवशंकर के साथ लेड़हा गांव में रहने लगी थी। बहन ने उसे 60 हजार रुपये दिया। इसके बदले शिवशंकर को कुछ जमीन रजिस्ट्री करनी थी। शिवशंकर को लालच आ गया। बहनोई की मौत के बदले मिलने वाले क्लेम को वह अपनी पत्नी के नाम से कराना चाह रहा था। उधर, बहन ने जमीन रजिस्ट्री करने के लिए दबाव बनाया। मां ने कहा कि वह अपने हिस्से की जमीन भोलू को बैनामा कर देगी। शिवशंकर दबाव में आ गया। बालापार में स्थित अपनी दुकान पर वह भांजे भोलू को लेकर गया। वहां जब शिवशंकर भोलू का गला दबाने लगा तो उसने मामा-मामा कहकर गुहार लगाई थी, लेकिन शिवशंकर ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। पांच साल बाद गिरफ्त में आए शिवशंकर ने इस बात का खुलासा किया।
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