देवरिया। जिला अस्पताल में मेडिकल के दौरान गिरफ्तार दो आरोपियों ने बताया कि उनको पुलिस लाइंस बुलाया गया था। वहीं से गिरफ्तार किया गया है। उनकी बाइक भी पुलिस लाइंस में ही खड़ी है। जबकि पुलिस का कहना है कि चारों आरोपियों को माल गोदाम परिसर से पकड़ा गया है।
बालिका गृह कांड में गिरफ्तार किए गए गिरिजा त्रिपाठी के दामाद व कंचनलता के पति संजीव त्रिपाठी और चंद्रहास ने बताया कि उन्हें एसआईटी ने पुलिस लाइंस में पूछताछ के लिए बुलाया था। जब वे पहुंचे तो गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें जबरन मामले में फंसाया जा रहा है। चारों आरोपियों ने बताया कि कोतवाली में पुलिस ने उनसे एक सादे कागज पर हस्ताक्षर भी कराए हैं।
वहीं इस मामले में लोगों में चर्चा है कि एसआईटी अपने साथियों को बचाने के प्रयास में लगी है, इसीलिए पुलिसकर्मियों पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। तत्कालीन एसपी, पूर्व एसपी और सीओ, कोतवाल, चौकी इंचार्ज को हटाने के बाद डीजीपी ने बालिका गृह में लड़कियों को भेजने वाले थानाध्यक्षों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब तक इस मामले में स्थिति जस की तस है।
देवरिया बालिका गृह कांड में संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी, बेटी और अधीक्षिका कंचनलता पहले से जेल में बंद हैं। सोमवार को दामाद संजीव त्रिपाठी, चंद्रहास यादव, डॉ.योगेंद्र कुमार दुबे और हयात अफरोज को जेल भेजा गया। 10 अगस्त से जिले में एसआईटी डेरा डालकर जांच कर रही है। इस कांड में सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद लोगों में चर्चाएं होने लगी हैं कि इस कांड के लिए पुलिस सबसे अधिक जिम्मेदार है, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि एसआईटी पुलिसवालों को बचाने में लगी है।
लाई डिटेक्टर टेस्ट पर फैसला कल
देवरिया। गिरिजा त्रिपाठी, कंचनलता और मोहन त्रिपाठी का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की अर्जी पर सोमवार को भी फैसला नहीं हो सका। पाक्सो कोर्ट अब इस मामले में तीन अक्तूबर को फैसला सुनाएगी। करीब डेढ़ माह से मामले की विवेचना में जुटी एसआईटी ने बीते 28 सितंबर को तीनों आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की अर्जी दाखिल की थी। इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सोमवार को इसमें फैसले की उम्मीद थी। देर शाम कोर्ट ने तीन अक्तूबर की तिथि तय की।