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साढ़े तीन घंटे की पूछताछ में जेल अधिकारियों, बंदीरक्षकों के पसीने छूटे

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एसपी कार्यालय से पूछताछ कर बाहर निकलती सीबीआई टीम। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। सीबीआई टीम ने शुक्रवार को जिला जेल में साढ़े तीन घंटे तक जेल के पूर्व अधिकारियों और बंदीरक्षकों से पूछताछ की। सवालों के जवाब देने में पूर्व अधिकारी और कर्मचारी पसीने-पसीने हो गए। टीम के सदस्यों ने जेल से कुछ रिकॉर्ड भी लिया। जेल कांड के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के होश उड़े हुए थे। बाहर खड़े बंदीरक्षक सीबीआई की जांच और कार्रवाई पर नजर गड़ाए हुए थे।
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दिसंबर महीने में लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल का अपहरण कर माफिया अतीक अहमद के गुर्गे देवरिया जेल ले आए थे। यहां उसकी पिटाई कर 45 करोड़ रुपये की संपत्ति के स्टांप पर हस्ताक्षर करा लिया गया। इसी की जांच के लिए गुरुवार की शाम सीबीआई टीम जिले में आई थी। पहले दिन जिला जेल में दो घंटे जांच कर टीम चली आई। शुक्रवार की दोपहर बाद टीम के आठ सदस्य फिर जिला कारागार पहुंचे। उन्होंने जेल के अंदर पत्रावलियों की गहनता से जांच की। अतीक से मिलने वालों के बारे में जानकारी ली। टीम के सदस्यों ने पूर्व जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय, पूर्व जेलर मुकेश कटियार, पूर्व डिप्टी जेलर देवकांत यादव, हेड वार्डर मुन्ना पांडेय और वार्डर राकेश कुमार शर्मा से बंद कमरे में पूछताछ की। उन्होंने अतीक को जेल में मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। साथ ही रियल एस्टेट कारोबारी के साथ घटना के दिन के आने-जाने वालों के बारे में जानकारी जुटाई। सीबीआई टीम के सदस्यों के सवालों का वे सही ढंग से जबाब नहीं दे पा रहे थे। साढ़े तीन घंटे की पूछताछ के बाद अधिकारी डांक बंगला आ गए।
इनसेट
डीएम और एसपी से मिले अफसर
देवरिया। सीबीआई के एसपी और एएसपी ने शुक्रवार की दोपहर कार्यालय पहुंचकर डीएम अमित किशोर और एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र से मुलाकात की। उन्होंने दोनों अधिकारियों से घटना की बाबत चर्चा की। इस दौरान दोनों जगह जनता दर्शन कुछ देर के लिए रोक दिया गया था।
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इनसेट में
संदिग्ध मोबाइल नंबर लिए
देवरिया। सीबीआई टीम ने जेल के कर्मचारियों और अधिकारियों के नंबर के साथ ही कुछ संदिग्ध नंबरों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ये अतीक के करीबियों के हो सकते हैं।

सीबीआई के निशाने पर क्राइम ब्रांच भी
देवरिया। माफिया अतीक अहमद को जेल में लजीज व्यंजन पहुंचाने वाली लक्जरी गाड़ी को पकड़कर छोड़ना क्राइम ब्रांच को भारी पड़ सकता है। शुक्रवार को जेल के पूर्व अधिकारियों और बंदीरक्षकों से पूछताछ में जानकारी मिलने के बाद सीबीआई के निशाने पर क्राइम ब्रांच भी आ गई है।
अप्रैल 2017 में प्रयागराज के नैनी जेल से माफिया अतीक अहमद को जिला जेल में शिफ्ट किया गया था। बताया जाता है कि अतीक के देवरिया जेल आने के बाद प्रयागराज से लेकर अन्य जगहों के रहने वाले उसके गुर्गे शहर के विभिन्न हिस्सों में किराए का मकान लेकर रहने लगे। अबूबकरनगर मोहल्ले के रहने वाले कुछ लोग अतीक के करीबी हो गए थे। अतीक की एक लक्जरी गाड़ी अबूबरकरनगर मोहल्ले का एक शख्स लेकर चलता था। जेल में और अन्य पुलिसकर्मियों को वह ही मैनेज करता था। रात के समय गाड़ी सीधे जेल में जाती थी। घर का बना लजीज व्यंजन जेल कर्मचारियों के सहयोग से अतीक तक पहुंचता था। जेल से जड़े सूत्र बताते हैं कि माफिया अतीक बाहर से बनकर आया भोजन ही खाता था। इससे जेल में खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने वाले भी फायदे में रहते थे क्योंकि अतीक के साथ कई अन्य लोगों का भी भोजन बाहर से आता था। किसी ने इस मामले की शिकायत एसपी से की तो उन्होंने क्राइम ब्रांच को जांच में लगाया। उसने लक्जरी गाड़ी में सवार पांच युवकों को पकड़ा था, लेकिन जाने क्या हुआ, कुछ देर बाद ही उन्हें छोड़ दिया गया। सीबीआई टीम को सीसीटीवी फुटेज में लक्जरी गाड़ी का खड़ा होना, बार-बार आना-जाना दिख रहा है। युवक की तस्वीर भी स्पष्ट दिख रही है। जेल सूत्रों की मानें तो सीबीआई उसे भी पूछताछ के लिए बुला सकती है।
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