इंस्पेक्टर पंकज कुमार शाही की मौत पर रोते बिलखते परिजन।
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भाटपाररानी। सिद्धार्थनगर में तैनात साइबर सेल के प्रभारी पकड़ी बाबू निवासी इंस्पेक्टर पंकज शाही की संदिग्ध हाल में हुई मौत से पूरा गांव स्तब्ध है। ग्रामीण इसे सीधे-सीधे हत्या मान रहे हैं। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। बुधवार को उनके गांव पहुंचकर क्षेत्रीय विधायक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।
पंकज शाही की पत्नी और बच्चा गोरखपुर में रहते थे। गांव पर माता-पिता व भाई का परिवार था। गांव के लोगों ने बताया कि पंकज कुमार शाही की ईमानदार और तेजतर्रार अधिकारियों में गिनती होती थी। पिता कृपा नारायण शाही, ग्राम प्रधान अभय प्रताप शाही, शिक्षक अरुण शाही, चचेरे भाई मुकेश शाही ने कहा कि 22 मई को रात में ड्यूटी से आकर पंकज पुलिस लाइन स्थित अपने कमरे में सोए। उनकी टेबल पर भोजन का पैकेट, पर्स, कुछ रुपये आदि वैसे ही पड़ा था। उनकी 23 मई को मतगणना के समय ड्यूटी थी, जिसमें भी वह अनुपस्थित रहे। उसके बाद कमरे में उनका शव पांच दिनों तक पड़ा रहा। कमरे से सड़ांध भरी दुर्गंध आने पर आसपास के लोग पहले तो समझे कि कहीं कोई चूहा मरा होगा, मगर 28 मई की रात्रि में जब पुलिस लाइन के कुछ लोग उधर से गुजर रहे थे तो उनके कमरे से आ रही दुर्गंध पर चौंक गए। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए। तब मौके पर पहुंचे एसपी और सीओ सहित अनेक अधिकारियों ने कमरे का ताला तोड़कर शव को बाहर निकाला और परिजनों को सूचना दिए। परिजनों का कहना है कि पांच दिन तक उनकी विभाग की ओर खोज खबर ना लेना, आनन-फानन में पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों के सुपुर्द करना, इस तरह की जल्दबाजी दिखाना यह साबित करता है कि हत्या के पीछे कोई कारण होगा। घरवालों ने घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग उठाई है। उधर, बुधवार को गांव पहुंचे क्षेत्रीय विधायक ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण अधिकारी की सिद्धार्थनगर जनपद के पुलिस अधिकारियों की ओर से पांच दिनों तक तलाश न किया जाना, उनकी खोज खबर नहीं लेना दर्शाता है कि इनकी साजिश के तहत हत्या की गई है। इसकी सीबीआई जांच जरूरी है। इसके लिए वह खुद प्रयास करेंगे।