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पुलिस जागती तो नहीं जाती अशोक की जान

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लार के दोगारी मिश्र में अशोक मिश्रा की हत्या के बाद रोते परिजन - फोटो : अमर उजाला
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शव को पुलिस को सौंपने से इंकार करते रहे परिजन, समझाने पर बनी बात
अमर उजाला ब्यूरो
लार। थानाक्षेत्र के दोगारी मिश्र गांव में एलआईसी एजेंट अशोक मिश्र की हत्या में परिजन पुलिस को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। पिता के मौत पर विलाप करती बेटी अमृता चीख-चीख कर कह रही थी कि अगर पुलिस ने भूमि विवाद को गंभीरता से लेते हुए सक्रियता दिखाई होती तो पिता की जान नहीं जाती। उधर, घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। उसे तहरीर मिलने का इंतजार है। परिजनों का कहना है कि कश्मीर में कार्यरत बड़े पिता के लौटने पर ही वह तहरीर देंगे। थानाक्षेत्र के दोगारी मिश्र गांव निवासी अशोक मिश्र एलआईसी एजेंट थे। उनका अपने पट्टीदारों से डीह की एक कट्ठे जमीन को लेकर विवाद था। रविवार की देर शाम वह गांव के पश्चिम तरफ खेत की पंपिंग सेट से सिंचाई कर रहे थे। आरोप है कि तभी दूसरे पक्ष के लोग वहां पहुंचे और लाठी-डंडे से पीटकर अशोक की हत्या कर दी। रात करीब नौ बजे बेटा कार्तिकेय मिश्र पिता को ढूंढते हुए खेत में पहुंचा तो उन्हें अचेत देखकर शोर मचाने लगा। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस शव को अपने कब्जे में लेना चाह रही थी, लेकिन नाराज परिजनों ने शव देने से इन्कार कर दिया। घंटों बहस के बाद देर रात परिजन शव लेकर घर चले गए। सोमवार की सुबह मृतक के घर पहुंचे एसओ राजेश सिंह ने काफी समझाया, तब जाकर परिजनों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंपा। तनाव को देखते हुए लार थाने की पुलिस पूरी रात गांव में जमी रही। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। पिता की मौत पर विलाप करती बेटी अमृता मिश्र बार-बार पुलिस की निष्क्रियता आरोप लगाती रही। उसका कहना था कि जमीन के विवाद को लेकर पिता कई बार थाने में गुहार लगा चुके थे, लेकिन पुलिस अनसुना करती रही। पत्नी अभिरंजन रोते-रोते गश खाकर गिर रही थी। बेटी काजल, विभा, कार्तिकेय, भारतेंदु का भी रो-रोकर बुरा हाल है। लोग उन्हें संभालने में जुटे रहे। इस बाबत एसओ राजेश कुमार का कहना था कि उनके कार्यकाल में विवाद थाने पर नहीं आया था। परिजनों की तहरीर का इंतजार है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

चार वर्षों से चल रहा था विवाद
अशोक के घर के बगल में डीह की जमीन है। उसी जमीन के लिए पट्टीदार श्रवण मिश्र से विवाद चल रहा था। इसे लेकर कई बार गांव स्तर पर दोनों पक्षों के बीच पंचायत हुई, मगर बात नहीं बन सकी। इसी विवाद में अशोक पर दो बार श्रवण ने जानलेवा हमला किया था।
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तीन भाइयों में सबसे छोटे थे अशोक
अशोक तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। वह घर पर ही रह कर खेती व एलआईसी में एजेंट का काम करते थे। भाई शंभू की मौत तीन साल पूर्व सड़क दुर्घटना में हो गई। दूसरे भाई राधेश्याम कश्मीर में एक प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। अशोक के पिता नथुनी मिश्र बेटे की मौत से काफी टूट गए हैं।
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