देवरिया। डॉ. अब्दुल खालिद के पिता मुस्तफा पुलिस विभाग में नौकरी करते थे। वह इमान और वसूूल के पक्के थे। बीच में नौकरी से इस्तीफा देकर घर चले आए। गांव पर ईंट भट्ठा खोले और फाजिलनगर से सपा की राजनीति शुरू किए। उनके दुनियां छोड़ने के बाद पूरी जिम्मेदारी इकलौते बेटे पर आ पड़ी। बावजूद इसके चिकित्सक ड्यूटी के साथ-साथ पिता के बनाए दायरा को सहेज कर चलते थे। उनकी हत्या की खबर मिलते ही सपा नेताओं का जमघट बघौचघाट थाने में लग गया।
मुस्तफा की सपा पार्टी में अच्छी पकड़ थी। इकलौते बेट की शादी वर्तमान में कुशीनगर के सपा के जिलाध्यक्ष इलियास की बेटी से किया था। दिनदहाड़े डॉ. अब्दुल खालिद की हत्या होने की खबर मिली तो आम लोग जहां बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए सड़क पर उतर आए, वहीं कुशीनगर और देवरिया के सपा नेता पहुंच गए। पूर्व सांसद बालेश्वर यादव, एमएलसी रामअवध यादव, पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह, देवरिया के सपा जिलाध्यक्ष रामइबाल यादव सहित पार्टी के अनेक नेता पहुंच गए जो देर शाम तक थाने में जमे रहे। मामला हाईप्रोफाइल होता देख डीएम सुजीत कुमार और एसपी राकेश शंकर सहित कई थानों की पुलिस जमी रही। लोगों में इतना गुस्सा था कि अगर पुलिस समझदारी का परिचय नहीं देती तो बवाल और बढ़ गया होता।