पाबंदी में चल रही पुलिस की मनमानी
जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं, उसे भेजी गई 107/16 की नोटिस
मृतक पर कर दी शांतिभंग की कार्रवाई, बाहर रहने वालों को भी नहीं बख्शा
जिले के सभी थानाक्षेत्रों में 16 हजार लोग किए गए हैं पाबंद
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सकुशल चुनाव संपन्न कराने के लिए पुलिस ने कई ऐसे लोगों की गतिविधियों को भी संदिग्ध बता दिया है, जिनका कहीं कोई आपराधिक रिकॉर्ड ही नहीं है। मृतक और लंबे समय से बाहर रह रहे लोग भी 107/16 की धारा में पाबंद किए गए हैं। इन्हें पुलिस नोटिस दे रही है। पत्र में उल्लेख है कि वह एसडीएम कोर्ट से बंधपत्र भरकर जमानत करा लें, वरना किसी अनहोनी की स्थिति में उस पर कार्रवाई होगी। पुलिस की नोटिस पहुंचने के बाद अब यह लोग सन्न हैं। वकीलों के साथ कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं। पुलिस के रडार पर आने के बाद उनकी हवाइयां उड़ रही हैं। मानसिक तनाव झेल रहे लोग बचाव में जेबें खाली कर रहे हैं।
बिना मुकदमा शांतिभंग की आशंका
सदर कोतवाली के रानीघाट गांव निवासी अखिलेश यादव पिछले 15 साल से भी अधिक समय से शहर के एक प्रतिष्ठित चिकित्सक के यहां काम करते हैं। अधिकांश समय वह यहीं देते हैं। उनका किसी से विवाद भी नहीं है और न ही कोई मुकदमा है। इसके बाद भी पुलिस ने उन्हें शांतिभंग में चालान कर दिया। गुरुवार को गांव के कुछ लोगों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे थे। बोले कि अब जमानत तो करानी ही पड़ेगी। पुलिस ने पता नहीं क्यों ऐसा किया है।
एक साल पहले हुई मौत, शांतिभंग में चालान
लार थानाक्षेत्र के कोहरा गांव के पूर्व प्रधान दीपक तिवारी का एक साल पूर्व सड़क हादसे में मौत हो गई। पूर्व में पंचायत चुनाव में विवाद की संभावना पर पुलिस ने उन्हें शांतिभंग में चालान किया था। पुलिस ने इस बार लोकसभा चुनाव में पाबंद करने वालों की सूची में उनका नाम भी शामिल कर लिया। पुलिसवाले उनके घर नोटिस तामिल कराने पहुंचे तो इस बात की जानकारी हुई। घरवाले तो पुलिस की इस कार्रवाई से खफा हैं ही, पुलिस भी पशोपेश में आ गई।
प्रयागराज में रहकर करता है पढ़ाई, हुआ पाबंद
लार कस्बे के कोइरी टोला वार्ड निवासी प्रिंस गुप्त पिछले कई साल से प्रयागराज में रहकर पढ़ता है। इस साल वह 12वीं कक्षा में है। उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में कोई मुकदमा नहीं है। इसके बाद भी लार पुलिस ने उसे शांतिभंग में पाबंद कर दिया है। इस बात की जानकारी परिवारवालों को तब हुई, जब पुलिसवाले नोटिस लेकर पहुंचे। परिवार के लोग परेशान हैं कि पुलिसवालों ने बाहर रहकर पढ़ने वाले लड़के पर इस तरह की कार्रवाई क्यों की है।
एक्सपर्ट की राय
अधिवक्ता प्रीतम मिश्र का बताते हैं कि शांति व्यवस्था में खलल का हवाला देकर किसी को भी पाबंद करना उचित नहीं है। वास्तव में जिनसे खतरा हो उन्हीं को पाबंद करना चाहिए। दरअसल, पुलिस पिछले चुनाव के रजिस्टर को देखकर यह कार्रवाई कर देती है। यह बिल्कुल ठीक नहीं है। जिन लोगों पर इस तरह की कार्रवाई हुई है, वह डीएम और एसपी से मिलकर अपनी बात रख सकते हैं। पुलिस उनके पाबंद करने की प्रक्रिया को वापस ले लेगी। बंधपत्र भरने का तात्पर्य यह भी है कि आप पुलिस के संदेह को पुष्ट कर रहे हैं और खुद बंधन में रहना स्वीकार कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की आशंका में पाबंद करने की कार्रवाई में काफी सावधानी बरती गई है। इसके बाद भी यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो इसकी समीक्षा कर कमियों को दूर किया जाएगा। - शिष्यपाल, एएसपी।