देवरिया। दूसरों की मदद और सेवा के लिए समर्पित रहे देवरहा बाबा और बाबा राघवदास जैसे संतों की भूमि पर मंगलवार की रात मानवता शर्मसार हो गई। रुद्रपुर रोड पर हुए हादसे ने सिर्फ आठ जिंदगियां ही नहीं छीनीं बल्कि समाज के गैर जिम्मेदार और स्वार्थी चेहरे को भी सामने ला दिया। हादसे के बाद बीच सड़क पर पड़े घायल छटपटाते रहे, लेकिन मदद की बजाए राहगीर मुंह मोड़कर आगे बढ़ते गए। दस मिनट में 15 से अधिक वाहन उस रास्ते से गुजरे। किसी ने भी रुककर मदद की जरूरत नहीं समझी और न ही पुलिस-प्रशासन के जिम्मेदारों को सूचना देने की जहमत उठाई। नतीजतन, फौरी उपचार देकर जिन्हें बचाया जा सकता था, उनकी भी जान चली गई।
घटनास्थल के सामने स्थित आयरन स्टोर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरा वाकया कैद हुआ है। रात करीब 12:57 बजे देवरिया की तरफ से तेज रफ्तार में आ रही बोलेरो पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो के परखचे उड़ गए। तेज धमाके के साथ बोलेरो के चारों दरवाजे और छत टूट गई। अंदर सवार चार-पांच लोग छिटककर 50 मीटर दूर जा गिरे। तीन सवार बीच की सीट के नीचे और दो अगले हिस्से में इंजन के पास दब गए। एक सवार वाहन के पहिए के नीचे आ गया था। घटना के तत्काल बाद एक जाइलो वाहन वहां से गुजरा। फिर दो मोटरसाइकिलें किनारे से निकल गईं। इसके बाद एक-एक कर 15 वाहन उसी रास्ते से गुजरे। सड़क पर पड़े दो घायल बार-बार हाथ उठाकर मदद का इशारा करते रहे, लेकिन कोई रुकने को तैयार नहीं था। करीब दस मिनट तक यही स्थिति रही। टक्कर की आवाज सुनकर 1:07 बजे घर से बाहर निकले जितेंद्र और रामकुमार ने 100 नंबर पर सूचना दी। इसके अगले ही मिनट अपाची दस्ते के कांस्टेबल बृजभान यादव मौके पर पहुंच गए। हद तो यह रही कि बृजभान ने भी उस रास्ते से गुजर रहे दो बोलेरो को रोककर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का आग्रह किया, लेकिन दोनों ने साफ इन्कार कर दिया। तब बृजभान ने बीच सड़क खड़े होकर एक टेंपो को रोका और सख्ती दिखाई तब टेंपो चालक तैयार हुआ। इसके बाद बृजभान ने अपने सहयोगी होमगार्ड, जितेंद्र, रामकुमार और टेंपो चालक की मदद से सचिन, शिवपूजन, दीपनारायण, रामखेलावन, कन्हैया को अस्पताल भेजवाया। इसी बीच एंबुलेंस और पुलिस के अन्य लोग भी पहुंच गए। अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद सचिन और शिवपूजन की मौत हो गई। सीसीटीवी कैमरे में इस दृश्य को देखकर लोग जहां बृजभान की सराहना करते रहे तो वहीं, घायलों को छोड़कर आगे बढ़ने वाले लोगों को कोसते रहे।
80 से ऊपर थी स्पीड, मोड़ पर भी नहीं हुई धीमी
देवरिया। रुद्रपुर रोड पर हादसे के लिए अकेले चालक ही दोषी नहीं है। पुलिस-प्रशासन और यातायात महकमे के लोगों की लापरवाही भी अनहोनी का कारण बनी है। लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास जिस जगह हादसा हुआ, वहां घुमावदार मोड़ है। बावजूद वहां न तो कोई संकेतक लगा है और न ही कोई अवरोधक है। किनारों पर दोनों तरफ पेड़ हैं। ऐसे में तेज रफ्तार में आने वाले वाहन अक्सर अनियंत्रित हो जाते हैं। मंगलवार की रात हुई घटना में भी ऐसा ही हुआ। बोलेरो की स्पीड 80 से भी ऊपर थी। मोड़ पर भी चालक ने कोई सावधानी नहीं बरती। उसी स्पीड से वह आगे बढ़ा। नतीजतन, सामने पेड़ में जोरदार टक्कर हो गई। आसपास के लोगों के मुताबिक मोड़ पर अक्सर वाहन बेकाबू हो जाते हैं, जिससे कई बार हादसे भी हुए। फिर भी जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। मोहल्ले के रामकुमार यादव, प्रेम शर्मा, संजय सिंह, अनिल सिंह, लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी अंगद तिवारी, मुन्ना तिवारी, अनिल राय आदि ने मोड़ के दोनों तरफ ब्रेकर, डिवाइडर और संकेतक लगवाने की मांग की है। कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
दादा-पोते ने गंवाई जान, सगे भाई की मौत
बोलेरो दुर्घटनाग्रस्त होने से चार सगे लोगों ने भी दम तोड़ दिया। दादा-पोते ने एक साथ जान गंवाई तो दो सगे भाई भी चंद घंटे के अंतराल पर दुनिया छोड़ गए। बरात में सत्यनारायण के साथ उनका बड़ा पौत्र सचिन भी साथ गया था। दोनों बोलेरो में एक साथ बैठे थे। दोनों की ही जानें चली गईं। महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में आठवीं का छात्र सचिन दो भाइयों में बड़ा था। उसकी मौत से मां लालपरी, पिता शंभू और छोटे भाई अनीश का रो-रोकर बुरा हाल था। भाई अनीश बार-बार कह रहा था कि अब वह किसके साथ स्कूल जाएगा। उधर, हादसे में मृत शिवपूजन और दलसिंगार भाई थे। शिवपूजन की मौत घटना के कुछ देर बाद जिला अस्पताल से गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में हो गई, जबकि दलसिंगार ने सुबह 11 बजे गोरखपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ा। मौत की खबर से दोनों परिवारों में कोहराम मचा रहा। दलसिंगार के घर पर मौजूद पत्नी सुभागी देवी, बड़े बेटे धर्मदेव, बहू उषा, पौत्र विद्यासागर, विकास, पौत्री माया और नेहा की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। छोटा बेटा रामदेव परिवार समेत बाहर रहता है। पिता की मौत की खबर सुनकर वह घर लौट रहा है।