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बालिका गृह की सील तोड़कर एसआईटी ने जांच की

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देवरिया रेलवे स्टेशन रोड स्थित बाल गृह बालिका कार्यालय का जांच पड़ताल करने के लिए सील ताले को तोड़ने के बाद भीतर जाती जांच टीम। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। बालगृह बालिका कांड की जांच में जुटी एसआईटी सोमवार को मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाजसेवा संस्थान के स्टेशन रोड स्थित कार्यालय पहुंची। कोर्ट के आदेश पर छह अगस्त से सील भवन का ताला तोड़वाकर टीम अंदर घुसी और वहां मौजूद दस्तावेज खंगाले। एसआईटी बालगृह बालिका की अधीक्षिका कंचनलता को भी अपने साथ लेकर जांच करने पहुंची थी। फोरेंसिक टीम भी मौजूद रही।
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करीब साढ़े पांच घंटे तक टीम के सदस्य सभी कमरों में जाकर बारी-बारी से साक्ष्य जुटाते रहे। सूत्रों के मुताबिक छानबीन के दौरान एसआईटी के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। इनमें विजिटर रजिस्टर, फोटो एलबम, मोबाइल चिप जैसी कई अन्य चीजें शामिल हैं। इनकी मदद से जांच टीम गिरिजा के करीबियों पर शिकंजा कसेगी। शाम 5.33 बजे एसआईटी तीन बड़े लिफाफों में अभिलेख लेकर बालगृह से निकल गई, जबकि अन्य अफसर वहीं जमे रहे।
दोपहर साढ़े 12 बजे एसपी विजिलेंस भारती सिंह व एसपी पीटीसी मेरठ की पूनम के नेतृत्व में एसआईटी स्टेशन रोड स्थित बालिका गृह के भवन तक पहुंची। यहां एसटीएफ पहले ही पहुंच चुकी थी। बतौर मजिस्ट्रेट एसडीएम रामकेश यादव व नायब तहसीलदार रामसहाय दुबे की मौजूदगी में भवन पर लगी सील तोड़ी गई, इसके बाद टीम मुख्य दरवाजे से अंदर गई। सीढ़ियों से ऊपर पहुंचने के महज पांच मिनट बाद ही टीम लौट आई। अंदर से दरवाजा बंद होने के कारण कमरों तक पहुंचना मुश्किल था। लिहाजा टीम दोबारा भास्कर प्रेस की गली में खुलने वाले पिछले दरवाजे से अंदर दाखिल हुई।
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मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करीब एक घंटे तक टीम अध्यक्ष के कमरे, कार्यालय के अलावा बालिकाओं के रहने वाले कमरों में छानबीन करती रही। इस दौरान कई रजिस्टर व अन्य अभिलेख हाथ लगे। दोपहर बाद 1:50 बजे महिला थाना प्रभारी जितेंद्र तिवारी बालगृह की अधीक्षिका कंचनलता को लेकर वहां पहुंचे। एसआईटी ने कंचनलता को 18 अगस्त से रिमांड पर ले रखा है। कंचनलता ने एसआईटी को कार्यालय से मिले अभिलेखों के बारे में जानकारी दी। शाम साढ़े पांच बजे तक टीम छानबीन में जुटी रही। फोरेंसिक लैब की टीम ने हर कमरे में जाकर साक्ष्य जुटाए। हर कार्रवाई के फोटोग्राफी व रिकॉर्डिंग भी कराई गई। इसके अलावा कम्प्यूटर का डाटा पेन ड्राइव में लेने के बाद फ्रिंगर प्रिंट के नमूने भी लिए। इस दौरान भवन के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। सीओ शितांशु यादव, कोतवाली प्रभारी राजवीर यादव खुद भवन के बाहर खड़े होकर निगरानी करते रहे। किसी को भी अंदर प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई।
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इनसेट
लड़कियों के कपड़ों-खिलौनों से भी लिए साक्ष्य
एसआईटी के साथ मौजूद फोरेंसिक टीम ने बालगृह बालिका के अंदर एक-एक कमरे में जाकर पड़ताल की। इस दौरान वहां मौजूद बिस्तर, लड़कियों के कपड़े, खिलौने सहित उनसे जुड़ी अन्य वस्तुओं से भी साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान अंदर के कई कमरों पर ताला लगा हुआ था। एसआईटी ने एक-एक कर सभी ताले तोड़कर कमरों में छानबीन की। इसके बाद उन पर नया ताला बंद कराया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे फिर से खोला जा सके।
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इनसेट
एसआईटी अंदर पहुंची तो छाया था घना अंधेरा
एसआईटी ने जब बालगृह बालिका के भवन में प्रवेश किया तो अंदर बिजली गुल थी। कमरों में अंधेरा छाया हुआ था। मेन स्विच से लाइट कटने के कारण उन्हें जांच-पड़ताल में काफी दिक्कत हो रही थी। उन्हें रजिस्टर व अभिलेख लेकर बार-बार खिड़कियों के पास जाना पड़ता था। लिहाजा आननफानन में इलेक्ट्रिशियन को बुलाया गया। बिजली दुरुस्त कराने के बाद टीम ने जांच में तेजी लाई। सूत्रों के मुताबिक टीम ने जांच के दौरान चारों तरफ से बंद और अंधेरे कमरों में लड़कियों को रखे जाने पर भी हैरानी जताई।
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इनसेट
छह अगस्त से सील था भवन
देवरिया। पुलिस ने पांच अगस्त की रात बालगृह बालिका पर छापामारी की थी। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी व पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार करते हुए यहां रह रही 23 लड़कियों को मुक्त कराया था। इसके बाद पुलिस ने इस पर ताला बंद कर दिया था। अगले दिन डीएम ने पहुंचकर जांच की और फिर शाम को अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की टीम यहां पहुंची। इसी दिन देर रात एडीएम सीताराम गुप्ता की मौजूदगी मेें भवन को सील कर दिया गया था। प्रवेश के सभी रास्तों पर प्रशासन ने ताला जड़ते हुए उसे सील किया था। कोर्ट की अनुमति के बाद मजिस्ट्रेट की निगरानी में सोमवार को सील तोड़वाकर एसआईटी अंदर पहुंची थी।
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इनसेट
कार्यालय में टंगी तस्वीरों की तस्दीक कराई
छानबीन के दौरान एसआईटी ने बालगृह के कार्यालय व कमरों में टंगी विभिन्न आयोजनों से जुड़ी तस्वीरों को भी देखा। इन तस्वीरों में गिरिजा त्रिपाठी, कंचनलता कई अफसरों व प्रभावशाली लोगों के साथ थीं। एसआईटी ने तस्वीरों में दिखने वाले हर शख्स की पहचान कर जानकारी जुटाई। कई तस्वीरों में यहां पूर्व में तैनात रहे अफसर भी हैं। इन तस्वीरों के आधार पर ही कुछ सामाजिक व राजनीतिक लोगों के नाम भी एसआईटी ने दर्ज किए हैं और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई है।
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कब्जे में ली गई गिरिजा के परिवार की लाल कार
प्वाइंटर
- बालगृह से भागी लड़की ने लाल रंग की कार का किया था जिक्र
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका कांड की जांच में जुटी एसआईटी ने गिरिजा त्रिपाठी के परिवार की लाल कार को कब्जे में ले लिया है। फोरेंसिक टीम ने इसके अंदर से भी नमूने जुटाए हैं। बालगृह से फरार लड़की ने पुलिस को दिए बयान में लाल रंग की कार का जिक्र किया था। माना जा रहा है कि यह वही कार हो सकती है। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।
पांच अगस्त को बालगृह बालिका से फरार 13 वर्षीय किशोरी ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि अक्सर लाल व काली रंग की कार आती थी, जिसमें लड़कियों को ले जाया जाता था। इसके बाद से ही जांच टीमें उन कारों की तलाश में जुटी हुई हैं। हाईकोर्ट ने भी पुलिस से लाल-काली कारों के बारे में जवाब तलब किया था। इसके लिए एसआईटी ने कई ट्रेवेल्स एजेंसी के संचालकों को भी नोटिस देकर पूछताछ की थी। एआरटीओ से भी इस बारे में रिपोर्ट मांगी गई थी। छानबीन के दौरान एसआईटी ने गिरिजा के परिवार में मौजूद लाल रंग की क्विड कार को कब्जे में ले लिया है। उसे फिलहाल कोतवाली पुलिस की सुपुर्दगी में सौंपा गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह वही कार है, जिसका किशोरी ने जिक्र किया था।
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