- सात माह पूर्व महराजगंज से लाई गई लड़की की बीमारी से मौत हुई थी
- डेढ़ साल पूर्व सिद्धार्थनगर भेजी गई किशोरी ने भी जताया था असंतोष
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका में सब कुछ सामान्य नहीं था। बहुत पहले से ही देखरेख में लापरवाही, अव्यवस्था और उत्पीड़न के आरोप लगते रहे। उचित उपचार न मिलने से करीब सात माह पहले एक किशोरी की मौत की अनदेखी हुई। इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए अफसरों ने पहले ही गंभीरता दिखाई होती तो काफी पहले ही अनियमितताओं की पोल खुल गई होती।
वर्ष 2009-10 से संचालित बालगृह बालिका की क्षमता 50 बालिकाओं की है। उनकी सही देखभाल व अन्य सुविधाओं के लिए हर साल एक करोड़ रुपये तक के बजट का प्रावधान है। इससे इतर संस्था में सुविधाएं काफी बदहाल है। पुराने भवन के तंग कमरों में रखी गई लड़कियों को न ढंग का बिस्तर है और न ही अन्य सुविधाएं। खिड़कियों तक जाने में भी उन्हें पाबंदी थी। ऐसे हाल में लड़कियां घुटन महसूस कर रही थीं।
बालगृह बालिका से मुक्त कराई गई किशोरी ने पुलिस को बताया था कि छोटी सी भूल होने पर बड़ी व छोटी मैडम फटकारती थीं। मार भी पड़ती थी। यही कारण रहा कि एक बार यहां से निकलने वाली लड़कियां वापस जाने से हिचकती थीं। करीब डेढ़ साल पहले यहां रह रही गोंडा निवासी एक किशोरी ने जब विरोध शुरू किया तो उसे सिद्धार्थनगर के बयारा बालगृह भेज दिया गया। महराजगंज से लाई गई एक किशोरी की तो इसी बालगृह में बीते दिसंबर में बीमारी से मौत तक हुई।
पड़ोस में लगे कैमरों की फुटेज पुलिस ने जब्त की
देवरिया। पुलिस को आस-पास के भवनों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से जांच में काफी मदद मिलने की उम्मीद है। बालगृह बालिका के बगल से निकली गली में एक प्रतिष्ठान के बाहर लगे कैमरों के 15 दिनों की फुटेज पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। सभी फुटेज को सील कर दिया गया है। प्रतिष्ठान के बाहर लगे एक कैमरे का मुंह उस तरफ है, जहां से बालगृह का पिछला दरवाजा खुलता है। सूत्रों के मुताबिक दूरी अधिक होने से बहुत कुछ स्पष्ट तो नहीं हो रहा, लेकिन कुछ वाहनों की आवाजाही व 5 अगस्त को फरार बालिका के बारे में जानकारी मिल सकती है।