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सीबीआई जांच में बेनकाब होंगे कई प्रभावशाली चेहरे

जिले में वर्तमान और पूर्व में पदस्थ अफसरों की बढ़ी बेचैनी
गिरिजा से रही है नजदीकी, उन्हीं के संरक्षण ने बढ़ाया मनोबल
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका में यौन शोषण व अनैतिक कार्य कराने के मामले की सीबीआई जांच ने कइयों की नींद उड़ा दी है। जांच की आंच में ऐसे कई प्रभावशाली चेहरे बेनकाब होंगे, जिनके गिरिजा त्रिपाठी से नजदीकी संबंध रहे। उन्हीं की शह पर गिरिजा ने अपनी संस्था को खूब आगे बढ़ाया। कहीं भी पेंच फंसने पर हर बार यह लोग ही मददगार के रुप में सामने खड़े होते थे। यही नहीं इस जांच में जिले के कई पूर्व और वर्तमान अफसरों का भी नपना तय है। यही कारण है कि सीबीआई जांच के आदेश के बाद उनकी बेचैनी बढ़ी हुई है।
मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के अंतर्गत संचालित बालगृह बालिका व स्वाधार गृह में अनियमितता व अनैतिक कार्यों की जो कहानी सामने आई है, वह सब अचानक नहीं हुआ है। वर्ष 2009 से चल रही संस्था में यह गड़बड़ियां पहले भी हुई होंगी, मगर पूर्व के अफसरों को कभी कोई खामी नहीं दिखी। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लाजिमी हैं। बताया जा रहा है कि कई प्रभावशाली लोगों के वरदहस्त के चलते कोई भी इस संस्था पर हाथ डालने की जहमत नहीं उठाता था। इसके अलावा गिरिजा त्रिपाठी खुद भी अफसरों से मिलकर उनसे मधुर संबंध बनाने में प्रवीण रही है। लिहाजा ज्यादातर अफसर उस ओर झांकते भी नहीं थे। इसी का लाभ लेकर अपनी संस्था को खूब बढ़ाया। अब मामले की जांच जब सीबीआई को सौंपी गई तो गड़े मुर्दे उखड़ने भी तय हैं। वह तमाम प्रभावशाली लोग सीबीआई की रडार पर आएंगे, जो गिरिजा त्रिपाठी को संरक्षण देते रहे। उधर, पुलिस महकमे में भी खलबली मची हुई है। महकमे की परेशानी वह रिकॉर्ड हैं, जिनमें संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद भी पुलिस की ओर से लगातार लड़कियां इसी गृह में रखे जाने का उल्लेख है। बाकायदा पुलिस कर्मी के नाम और बैच नंबर भी इस रिकॉर्ड में दर्ज है। जाहिर है कि थाने की पुलिस अपनी मर्जी से ऐसा नहीं करती होगी। उच्चाधिकारियों की सहमति भी कहीं न कहीं रही होगी। यह अफसर भी प्रश्रय देने वालों के रूप में गिने जा रहे हैं। जांच में इन पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। यही कारण है कि अभी से उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी है। अपनी गर्दन बचाने के लिए वह रास्ते ढूंढने में जुट गए हैं।
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लखनऊ में बड़े अफसरों से मिली थी गिरिजा

आईएएस-आईपीएस से मिलकर पुराने संबंधों की दी थी दुहाई
एक आईपीएस ऑफिसर ने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखी बातें
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय और तेज-तर्रार महिला के रूप में गिनी जाने वाली गिरिजा त्रिपाठी को खुद पर शिकंजा कसने का आभास पहले ही हो गया था। तभी तो करीब 15-20 दिन पूर्व लखनऊ जाकर अपने पूर्व परिचित अफसरों से संपर्क साधा था। पुराने संबंधों का हवाला देकर रास्ता दिखाने की गुहार लगाई। एक वरिष्ठ आईपीएस ऑफिसर ने खुद सोशल मीडिया में इसे सार्वजनिक किया है।
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वर्ष 2000 के करीब जिले में तैनात रहे इस आईपीएस ने अपनी पोस्ट में साफ लिखा है कि गिरिजा त्रिपाठी इस घटना से 15 दिन पूर्व उनसे लखनऊ आवास पर मिली थी। 18 साल बाद हुई मुलाकात पर चौंकते हुए जब कारण पूछा तो पत्नी से मिलने की इच्छा जताई गई। इसके बाद बिना कुछ बताए ही वह चली गई थी। आशंका है कि गिरिजा ने कई अन्य वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस से भी भेंट की होगी। जिले में तैनाती के दौरान तमाम अफसर अभी भी गिरिजा के संपर्क में रहे। वर्तमान में एक बड़े पद पर तैनात आईएएस अधिकारी पर ही इस संस्था को सबसे ज्यादा संरक्षण देने की चर्चा है। इसी तरह गोरखपुर जोन में तैनात एक आईपीएस भी संस्था पर काफी मेहरबान रहे। पुलिस की छापामारी से पूर्व गिरिजा के इन सभी अफसरों से संपर्क साधने की चर्चा है।
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