देवरिया। इस बार बरसात में होने वाली आंखों की बीमारी कंजेक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू ज्यादा संक्रामक है। इसके संक्रमण की दर पिछले वर्षों से छह गुणा है। डाॅक्टरों के अनुसार संक्रमित को छूने भर से भी यह फैल रही है। जो समय से इलाज नहीं करा रहे है, उनकी कार्निया यानी आंख के पिछले हिस्से में सूजन हो जा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कन्हैया प्रसाद के अनुसार इस बार दो प्रकार का आई फ्लू हो रहा है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि वायरस का यह स्ट्रेन नया है। इसकी पहचान के लिए जीनोम सिक्वेसिंग भी की जा रही है। इसके लिए एम्स गोरखपुर के भी डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज में नेत्र विभाग में करीब 435 मरीज पहुंचे, जिसमें 250 के करीब मरीज आई फ्लू के थे। जबकि अन्य सीएचसी, पीएचसी पर भी आई फ्लू के मरीज काफी संख्या में पहुंचे।
मौसम में बदलाव बना संक्रमण का कारण
डॉ. कन्हैया प्रसाद का कहना है कि इस बार मौसम में अचानक बदलाव हुआ है। इसके चलते वातावरण की नमी से कंजेक्टिवाइटिस के वायरस को फैलने में मदद मिली है। इस बीमारी से परेशान मरीज एक ही कपड़े से बार-बार आंख साफ कर रहे हैं। आंख को मसल रहे हैं। ऐसे लोगों में संक्रमण गंभीर हुआ है। आई फ्लू भी दो प्रकार के सामने आ रहे हैं। इसमें वायरल इंफेक्शन के मामले में आंखों में जलन, खुजली, लाली, पानी निकले की समस्या होती है। जबकि बैक्टीरियल इंफेक्शन के मामले में इन लक्षणों के साथ आंखों में कीचड़ भी निकलता है।
लक्षण
- आंख का लाल या गुलाबी होना, जलन व खुजली होना
- अधिक पानी, कीचड़ आना
- आंखों में चुभन महसूस होना, सूजन होना
बरतें सावधानी
- हाथों को बार-बार साबुन तथा पानी से साफ करें
- आंखों तथा चेहरे को साथ करने के लिए साफ रुमाल, तौलिया का प्रयोग करें और उसकी सफाई करें
- नियमित प्रयोग किए जाने वाले चश्मे को अच्छी तरह साफ करें
- संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए काला चश्मा पहनें
- पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का प्रयोग करें
- सूरज की सीधी धूप, मिट्टी-धूल आदि से दूर रहें।
- संक्रमित व्यक्ति के प्रयोग किए जा रहे आई ड्राॅप, रुमाल, आंखों के मेकअप की सामग्री, तौलिया, तकिया के कवर आदि का प्रयोग न करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना किसी आई ड्राॅप व दवा का प्रयोग न करें
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें
- इस बार संक्रमण ज्यादा प्रभावी है। मंगलवार को करीब 250 मरीज आई फ्लू के आए। ऐसे मरीजों के बारे में स्टडी भी की जा रही है। इस बार संक्रमण की रफ्तार ज्यादा है। लोगों को सावधानी बरतनी होगी, लापरवाही से दिक्कत बढ़ जाएगी। - डॉ. कन्हैया प्रसाद, नेत्र रोग विशेषज्ञ