प्रशासन के दम पर अूधरे कार्य को पूरा करने की तैयारी, किसानों ने चेताया, बात नहीं बनी तो जाएंगे हाईकोर्ट
- 31 मार्च तक काम हो जाना चाहिए था पूरा, 11 किलोमीटर डाली जानी है पाइप लाइन, एक किलोमीटर काम है अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गुजरात के कांगड़ा से गोरखपुर जनपद होकर बैतालपुर तक एलपीजी (लिक्विड फाइड पेट्रोलियम गैस) पाइपलाइन का काम किसानों ने रोक दिया है। यह देख एक किलोमीटर अधूरे काम को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन को आईबीएच ने पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है निर्धारित मुआवजा राशि से अधिक नहीं दिया जा सकता है। जबकि किसानों का कहना है कि मुआवजा ग्रामीण क्षेत्र का दिया जा रहा है। जबकि गांव अब नगर पंचायत का हिस्सा बन गया है। इस कारण नए सिरे से मुआवजा तय होना चाहिए। इसके चलते सर्किल रेट से कम पर किसान मानने को तैयार नहीं है।
करीब ढ़ाई साल से गैस पाइप लाइन का काम चल रहा है। जिले की सीमा में बैतालपुर तक एलपीजी पाइपलाइन का काम ग्यारह किलोमीटर तक होना है। यह पाइपलाइन इंदूपूर, कालावन, लबकनी, उसरी बुर्जुग, मदैना, बढया, सांडा गांव तक बिछाई जानी है। इसे मार्च 2023 में ही पूरा हो जाना था, लेकिन काम में देरी हो गई है। एक किलोमीटर पाइप लाइन बढ़ाया गांव में डाली जानी है। जिसे सर्किल रेट से कम पर मुआवजा मिलने के कारण 16 किसानों ने काम को रोक दिया है। बढ़या गांव के किसानों ने बताया कि मुआवाजा देने में बेइमानी की जा रही है। मनमानी तरीके से मुआवजा दिया जा रहा है। किसानों की भूमि कौड़ियों के भाव ली जा रही है। बढ़या गांव अब नगर पंचायत बैतालपुर का वार्ड हो गया है। इस कारण ग्रामीण मुआवजा नहीं लिया जाएगा, शहरी क्षेत्र का सर्किल रेट दिया जाए। जबकि आईबीएच सर्किल रेट का चालीस प्रतिशत मुआवजा देने को तैयार है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि वह भूमि को खरीदा नहीं रहे हैं, केवल कुछ हिस्सा में पाइप लाइन डालने के लिया जा रहा है। उन्हें खेती करने से रोका नहीं जाएगा। पर इस भी किसान तैयार नही है।
कोट:
किसान अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इनसे वार्ता भी की गई, लेकिन वह नहीं मान रहे हैं। इस वजह से काम प्रभावित हो रहा है। सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जाना संभव नहीं है। जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। इसके बाद प्रशासन काम पूरा कराने के लिए व्यवस्था करेगा। मुआवजे का पेच फंसने के कारण परियोजना में देरी हो रही है। अब काम 31 दिसंबर तक पूरा अब किया जाएगा।
-दिव्यांशु राय, परियोजना प्रबंधक
कोट
आवासीय है और नगर पंचायत में गांव शामिल हो गया है। इस हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। जब तक मुआवजा आवासीय रेट से नहीं मिलेगा, तब तक भूमि नही दी जाएगी।
जयराम पासवान
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कोट
हमारी भूमि 101 एयर से कम है। सरकारी मानक में यह दर्शाया गया है कि इससे अधिक भूमि होने पर ही सर्किल रेट का 40 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा। जब तक हमें वाजिब दाम नहीं मिलेगा, हम जमीन नहीं देंगे।
शिव गोविंद तिवारी
कोट
अगर मुआवजा नहीं मिलेगा तो हाईकोर्ट जाएंगे। अपनी जमीन से पाइप लाइन नहीं जाने देंगे। इसके लिए कुछ भी करना पड़े, किया जाएगा। आने वाले समय में आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
रामकृपाल यादव
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बाईपास मार्ग का भी मामला अभी सुलझा नहीं
देवरिया। 22 किलोमीटर के बाईपास मार्ग को लेकर 37 गांवों के किसानों का मामला अभी सुलझ नहीं पाया है। यहां के किसान भी बाजार भाव से चार गुना मुआवजा की मांग कर रहे है। किसानों को जिला प्रशासन अभी सर्किल रेट से मुआवजा देने को तैयार है। मुआवजा संघर्ष समिति के अजीत त्रिपाठी ने बताया कि किसानों की भूमि औने-पौने दाम पर लेने का प्रयास किया जा रहा है। जहां पर भी सरकारी कार्य के लिए भी ली जाएं, कम से कम किसानों का ख्याल किया जाना चाहिए। बाईपास मार्ग के लिए अगर भूमि ली जा रही है तो 20 जुलाई तक प्रशासन किसानों की मांग को पूरा कर दे। अगर मांग पूरी नहीं हुई तो गांव- गांव जनजागरण कर आंदोलन किया जाएगा। किसान किसी भी दशा में बाजार भाव से कम पर मुआवजा लेकर जमीन देन को तैयार नहीं है।
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कोट
विकास होना जरूरी है, लेकिन किसानों की भूमि का वाजिब दाम भी मिलना चाहिए। सड़क, पाइप लाइन सहित जो भी कार्य हो रहे हैं, वह समाज के हित में है। सभी का ख्याल होना चाहिए। इसके लिए प्रशासन और किसान दोनों को आपस में मिलकर सुलह का रास्ता अपनाना चाहिए।
राजीव मणि, पूर्व प्रधान बांस पार बुजुर्ग