- कच्ची सड़कें, मोहल्लों में जलभराव, नए वार्डों में पथ प्रकाश, पेयजल की समस्या से पाना होगा निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। 30 मई को संभावित शपथ ग्रहण के साथ नगर में नई सरकार के अस्तित्व में आ जाने की संभावना है। इस सरकार के लिए आने वाले पांच साल चुनौतियों से भरे हैं। सीमा विस्तार में शामिल हुए आठ नए वार्ड के करीब 50 हजार लोगों तक शहरी सुविधाएं पहुंचाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी। इनमें ज्यादातर वार्डों में संपर्क मार्ग की स्थिति ठीक नहीं है। पेयजल पाइप व पथ प्रकाश की सुविधा नहीं है। कई पुराने वार्डों में भी समस्याओं का अंबार है। सोमनाथ नगर, पिड़रा, अली नगर, शहीद नगर, बाबू बभनी, चटनी गड़ही मोहल्ला, रामगुलाम टोला पूर्वी, चकियवां मंगलमपूरम आदि मोहल्लों में बरसात शुरू होते ही जलभराव की समस्या से लोगों को महीनों जूझना पड़ता है। सड़क-नाली का अभाव है। इसके अलावा शहर में वाहन पार्किंग का इंतजाम, अस्थायी कूूड़ा डंपिंग ग्राउंड को सुव्यवस्थित बनाने की जिम्मेदारी नई सरकार की होगी।
पांच सौ से अधिक सड़कों के निर्माण की चुनौती
नगर क्षेत्र में नए व पुराने वार्डों को मिलाकर करीब चार सौ सड़कें कच्ची हैं। घर बना लेने के बाद से ही लोग सड़क पक्की होने का इंतजार कर रहे हैं। सौ से अधिक संपर्क मार्गों के निर्माण की दरकार है। जिससे नए वार्डों को सीधे शहर से जोड़ा जा सके।
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जल निकासी का इंतजाम
शहर में जल निकासी की समस्या बीते पांच साल से नासूर बनी है। इसके लिए 44 करोड़ की परियोजना पर काम तो चल रहा है, लेकिन इसका लाभ ज्यादातर शहर के मध्यवर्ती बासिंदो को ही मिल पाएगा। सोमनाथ नगर, रामगुलाम टोला पूर्वी, अली नगर, शहीद नगर, बाबू बभनी, चटनी गड़ही मोहल्ला, चकियवा मंगलमपूरम आदि मोहल्लों नाली निर्माण न होने के चलते बरसात में जलभराव की समस्या रहती है।
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60 हजार लोगों तक पहुंचाना होगा पेयजल
वर्तमान समय में नगर पालिका करीब 20 हजार परिवारों को ही पाइप के सहारे पेयजल आपूर्ति कर पा रही है। पुराने वार्डों के लगभग 10 हजार परिवार पहले से ही पेयजल सुविधा से वंचित हैं। इसके अलावा नव सृजित आठ वार्ड में पेयजल पाइप लाइन का काम नहीं हुआ है। यहां कि आबादी हैंडपंप पर निर्भर है।
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10 हजार जगहों पर करना होगा उजाला
नगर पालिका ने शहर में 7509 जगहों पर पथ प्रकाश की व्यवस्था की है। सीमा विस्तार के बाद करीब 10 हजार प्रकाश प्वाइंट चिह्नित कर स्ट्रीट लाइट लगवाना पड़ेगा। इसके अलावा पुरवा चौराहा से रुद्रपुर मोड़ तक पोल लगाकर प्रकाश की व्यवस्था सुदृढ़ करनी पड़ेगी।
सफाई व्यवस्था सुधारने की चुनौती
नगर पालिका के पास नियमित, संविदा व आउट सोर्सिंग मिलाकर करीब साढ़े तीन सौ सफाई कर्मी हैं। पहले से ही 50 कर्मियों की कमी थी। अब सीमा विस्तार होने के बाद नए वार्डों में करीब 80 सफाईकर्मी तैनात करने पड़ेंगे। इसके अलावा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, अस्थायी कूड़ा डंपिंग ग्राउंड का निर्माण कराना होगा।
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पार्किंग की व्यवस्था जरूरी
शहर में कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। नगर पालिका 10 साल से हर बार की बजट बैठक में पार्किंग की सुविधा देने के लिए मसौदा तैयार करती है। जगह न मिल पाने के चलते यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला जाता है। शहर में पार्किंग की सुविधा नहीं होने के चलते लोग अपने वाहन सड़क पर खड़ी करते हैं। इससे दिन भर जाम की समस्या उत्पन्न होती है।
कोट
बीते 10 साल में शहर का विकास काफी तेजी से हुआ है। जगह-जगह हाइड्रोलिक हाई मास्क टाॅवर की स्थापना की गई है। 50 से अधिक मुख्य मार्गों का रिनिवल व निर्माण कराया गया है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए कूड़ा डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन क्रय की गई। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लाटं, एफएसटीपी व एमआरएफ का निर्माण कराया गया है। 14 सार्वजनिक व महिलाओं के लिए चार पिंक शौचालय बनाए गए हैं। आगामी पांच साल में मुख्यमंत्री नव नगर सृजन योजना व पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के माध्यम से नए वार्डों का विकास किया जाएगा। पार्किंग का इंतजाम भी इस बार कर लिया जाएगा। - अलका सिंह, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद देवरिया