86 गांवों को मिलेगी शहर की बिजली
बदले जाएंगे तार और पोल, बिजली निगम ने स्टीमेट बनाना शुरू किया
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। देवरिया नगर पालिका में शामिल 23 गांवों सहित 86 की बिजली व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। निकाय में शामिल हुए इन गांवों को अब शहर की बिजली नसीब होगी। इसके लिए बिजली निगम ने इन गांवों का स्टीमेट बनाना शुरू कर दिया है। इसके बाद शासन को भेजा जाएगा। इतना जरूर है कि इन जगहों पर बिजली बिल अब उपभोक्ताओं को अधिक देना पड़ेगा, लेकिन इसके बदले उनको बिजली अधिक भी मिलेगी।
जिले के देवरिया, बरहज में 31 गांव नए शामिल किए गए हैं, जबकि तरकुलवा में सात, पथरदेवा में आठ, मदनपुर में छह, बैतालपुर में 14, भलुअनी में 14, हेतिमपुर में छह गांवों को मिलाकर नई नगर पंचायतें बनी हैं। इन निकायों में 86 गांव शामिल किए गए हैं।
अभी तक इन गांवों में फिक्स रेट से ग्रामीण विद्युत मिलती थी, लेकिन अब इन गांवों में शहर की बिजली देने की कवायद शुरू हो गई है। बिजली निगम इन गांवों के उपभोक्ताओं को शहर के कनेक्शन के रूप में बदलने जा रहा है। इन गांवों में जर्जर तार, पोल बदले जाएंगे और ट्रांसफॉर्मर की क्षमता वृद्धि की जाएगी। नंगे तारों को बदलकर कवर्ड तार लगाने की योजना बनाई गई है। हर खंभे पर एक स्ट्रीट लाइन भी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे गांव की गलियां जगमग रहेंगी।
चार घंटे अधिक मिलेगी बिजली
देवरिया। निगम के अफसरों के अनुसार देहात की बिजली साढ़े तीन से पांच रुपये प्रति यूनिट होती है, जबकि शहर की बिजली साढ़े पांच से छह रुपये प्रति यूनिट होती है। बिजली आपूर्ति देहात के इलाके में निगम 18 करता है, जबकि निकाय में 22 घंटे बिजली दी जाती है। वहीं नगर पालिका क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने का प्राविधान है, जिसका फायदा देवरिया नगर पालिका में शामिल 23 गांव और बरहज में शामिल आठ गांवों के बाशिंदों को मिलेगा।
नई बस्तियों की समस्या होगी दूर
देवरिया। नगर पालिका देवरिया के पुराने 25 वार्डों के अलावा पास के गांवों तक नई बस्ती बस चुकी है, जिसमें बांस-बल्ली के सहारे अधिकतर जगहों पर बिजली की आपूर्ति हो रही है। नगर पालिका क्षेत्र विस्तारित गांव कतरारी, सोंदा, पिड़रा, पिपरपाती, जटमलपुर, तिलईबेलवा, खरजरवा, सकरापार, कठिनइयां, मेहड़ापुरवा आदि जगहों पर जो मकान गांव के बाहर बने हैं। इन जगहों पर बिजली निगम कनेक्शन देने के बाद भी पोल नहीं उपलब्ध करा पाया है। इस कारण लोग बांस-बल्ली के सहारे केबल से अपना घर रोशन करते हैं। सबसे अधिक दिक्कत बरसात के दिनों और आंधी आने पर होती थी।
कोट:
नगर निकाय क्षेत्र में शामिल गांवों में जो ग्रामीण कनेक्शन है, उन्हें शहरी कनेक्शन के रूप में तब्दील करने की प्रक्रिया चल रही है। इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इन गांवों का अलग से स्टीमेट तैयार किया जा रहा है, ताकि शहर की बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
-जीसी यादव, अधीक्षण अभियंता