आसपास गांवों से भी हर धर्म के श्रद्धालु पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। क्षेत्र के सेल्हरापुर में सैयद यासीन शाह की दरगाह पर 43वें सालाना उर्स में दूसरे दिन सोमवार को चादरपोशी की रस्म हुई। दरगाह प्रमुख और मुरीद गणों ने बाबा की दरगाह पर चादर पेश की। दूर-दराज से पहुंचे जायरीन भी दिनभर मन्नतों की चादर चढ़ाते रहे। इस दौरान दरगाह पर भारी भीड़ उमड़ी थी।
सेल्हरापुर में प्रसिद्ध सूफी संत सैयद यासीन शाह की दरगाह पर सोमवार को दरगाह प्रमुख सैयद शकील अहमद शाह, मेहंदी हसन शाह और सैयद नूर हसन शाह ने मुरीद गणों के साथ मिलकर बाबा की दरगाह पर चादर पेश की। इसके बाद दिल्ली के ओखला से पहुंचे जैनुद्दीन, मुंबई से सलीम, पटना से आयुष कुमार, मोतीहारी से निर्भय तिवारी समेत मध्यप्रदेश के भिंड, सिवान, गोपालगंज, कानपुर, झांसी, लखनऊ, गोरखपुर, खलीलाबाद से पहुंचे जायरीन ने दरगाह पर मन्नतों की चादर चढ़ाई। दिनभर चादरपोशी की रस्म चलती रही। दरगाह पर मन्नतें पूरी होने पर जायरीन सहित आसपास के हर धर्म के श्रद्धालु भी चादर चढ़ाते हैं।
दरगाह प्रमुख ने बताया कि चादरपोशी के बाद मुरीद गणों ने गुलाब फूल की पंखुड़ियां बाबा को चढ़ाकर अगरबत्ती दिखाई। इसके अलावा सोमवार और मंगलवार पूरी रात कव्वाली का कार्यक्रम चलेगा। मऊ, वाराणसी, जौनपुर,कानपुर और खलीलाबाद से आए कव्वाल कव्वाली प्रस्तुत कर उर्स की शान बढ़ाएंगे।
उधर, सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। इंस्पेक्टर दिलीप सिंह ने बताया कि सूचना मिली है कि बाहरी प्रांतों से आए कुछ जायरीन देवरिया होटलों में भी ठहरे हुए हैं। वैसे सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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1983 में बाबा के स्थान पर हुआ था चमत्कार, मरा बच्चा हो गया था जिंदा
संवाद न्यूज एजेंसी
सन 1983 में लगे उर्स में दरगाह पर पड़री बाजार से इकबाल अंसारी और उनकी पत्नी अपने आठ साल के बच्चे अजमत अंसारी को लेकर पहुंचे थे। दरगाह प्रमुख सैयद शकील अहमद शाह ने बताया कि पति-पत्नी मिलकर बाबा के पास मन्नतें मांगने आए थे। बाबा से उन्होंने एक और संतान देने की मन्नत मांगी और बेटे को लेकर मेला घूमने लगे। उर्स में भीड़ अधिक होने से उनका बेटा अजमत खेलते हुए कहीं खो गया। इसके बाद दरगाह पर माता-पिता पहुंचकर बच्चे के मिलने की गुहार लगाई और फिर ढूंढ़ने लगे। जब बेटा नहीं मिला तो बाबा के पास चिल्ला-चिल्लाकर रोते हुए कहने लगे। हम जोड़े की मन्नत मांगने आए और हमारा इकलौता बेटा ही हमसे छिन गया। तकरीबन दो घंटे बाद अजमत का शव दरगाह के पास स्थित पोखरी में उतराया मिला। आननफानन पोखरी से बच्चे का शव बाहर निकाल बाबा की चौखट पर सुलाया गया। उर्स में पहुंचे डाक्टरों ने बच्चे की नब्ज टटोलते हुए उसे मृत घोषित कर दिया था। माता-पिता निराश होकर बेटे का शव लेकर अभी दरगाह से कुछ दूर ही पहुंचे थे तबतक अजमत अचानक उठ खड़ा हुआ और बोलने लगा। अम्मी, अब्बू हमें कहां लेकर चल रहे हैं। चमत्कार देख माता-पिता उसे लेकर फिर बाबा की दरगाह पर पहुंचे। बेटे अजमत के जीवित होने पर राजमिस्त्री पिता इकबाल अंसारी ने सेल्हरापुर मजार पर लगातार एक साल तक निशुल्क काम किया था। सोमवार को दरगाह पर पहुंचे पड़री बाजार गांव निवासी आबिद ने बताया कि इस समय अजमत सऊदी अरब में है। उसके तीन और भाई भी हैं। इस चमत्कार के बाद आसपास गांवों के हर धर्म के श्रद्धालुओं की आस्था और दरगाह के प्रति बढ़ गई। दरगाह प्रमुख ने बताया कि जिसपर नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं वह तालाब का पानी ले जाकर पीते हैं तो ठीक हो जाते हैं। ऐसी बाबा की कृपा है। इस तरह का बहुत सारा चमत्कार हुआ। इसीलिए तालाब को स्वच्छ रखा जाता है।