शपथपत्र में दर्ज आपराधिक मामलों को छिपाकर नामांकन दाखिल करने का आरोप
पूर्व चेयरमैन की शिकायत पर मामले की जांच हुई तो सत्यता हुई उजागर
डीएम के निर्देश पर सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने कोतवाली में दर्ज कराई प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नगर निकाय चुनाव में नामांकन पत्र के साथ झूठा और गलत शपथपत्र देने के आरोप में सलेमपुर चेयरमैन पर सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह केस जिलाधिकारी व जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने दर्ज कराया है।
वर्ष 2023 में हुए नगर निकाय चुनाव में निर्वाचित सलेमपुर चेयरमैन श्रीराम यादव ने नामांकन के समय गलत शपथपत्र अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। यही नहीं उन्होंने प्रारूप-7 में आपराधिक कृत्य के कॉलम में दर्ज मुकदमे को नहीं दर्शाया था। चुनाव बीतने के कुछ माह बाद जब पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्ता को जानकारी हुई तो उन्होंने 2 दिसंबर 2023 को चुनाव आयोग, डीएम व मंडलायुक्त से शिकायत की। इसे संज्ञान में लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी व डीएम अखंड प्रताप सिंह ने मामले की एसपी सकंल्प शर्मा से जांच कराई तो मामला सत्य पाया गया। इसके आधार पर 9 फरवरी 2024 को सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी अमरेश कुमार ने पत्र भेजकर प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही। प्राथमिकी नहीं दर्ज हुई तो 24 फरवरी को कोतवाल को फिर रिमांडर भेजा।
इसके बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई तो पूर्व चेयरमैन ने तहसील दिवस में अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र कुमार चौधरी को शिकायती पत्र सौंपा। 3 मार्च को सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर सलेमपुर चेयरमैन पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
सीओ सिटी संजय रेड्डी ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
सलेमपुर चेयरमैन पर दर्ज हैं चार मामले, एक में हुई थी छह माह की सजा
सलेमपुर चेयरमैन श्रीराम यादव पर चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसका जिक्र उन्होंने नामांकन के समय दिए गए शपथपत्र में नहीं किया था। इसका खुलासा उस समय हुआ जब पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्ता ने शिकायत चुनाव आयोग व जिला निर्वाचन अधिकारी से की। पूर्व चेयरमैन सुधाकर गुप्ता के अनुसार, वर्तमान चेयरमैन ने अपने ऊपर दर्ज चार मुकदमों में से किसी एक का भी शपथपत्र में जिक्र नहीं किया था। पूर्व चेयरमैन के अनुसार, वर्तमान चेयरमैन पर वर्ष 2002 में धारा 323, 504, 506 व एससी-एसटी के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसमें छह माह की सजा हुई थी। चेयरमैन ने इस मामले में हाईकोर्ट से जमानत ले ली है।
इसी तरह वर्ष 2009 में धारा 323, 452, 504, 506 व 395 आईपीसी के तहत मामला दर्ज था। इसी वर्ष उनपर एक गुंडा एक्ट का मामला दर्ज हुआ था। वर्ष 2016 में धारा 188, 289, 291, 341, 188 के तहत मामला दर्ज है।