फाइलेरिया मरीजों और सहायता समूह नेटवर्क के सदस्यों को रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांगता नियंत्रण (एमएमडीपी) के बारे में शुक्रवार को प्रशिक्षण दिया गया। बनकटा ब्लॉक के राजपुर और चकिया कोठी गांव में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से फाइलेरिया के 25 मरीजों को एमएमडीपी किट भी दी गई। मरीजों को उपचार और देखभाल के बारे में भी बताया गया। इसके अलावा फाइलेरिया ग्रसित अंगों की साफ-सफाई के बारे में समझाया गया।
जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के साथ-साथ हाथीपांव प्रबंधन का भी कार्यक्रम चल रहा है। कार्यक्रम के जिला समन्वयक देशदीपक ने कहा कि इस बीमारी से बचने के लिए साल में एक बार लगातार पांच वर्ष तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन ही श्रेष्ठ उपाय है। कहा कि, फाइलेरिया रोगी सहायता समूह नेटवर्क के सदस्य अपने क्षेत्र में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति लोगों को जागरूक करें। ब्लॉक के स्वास्थ्य निरीक्षक नीरज कुशवाहा ने कहा कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दूषित पानी में पनपते हैं। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया ग्रसित व्यक्ति को काटने के बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के परजीवी खून के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी ग्रसित कर देते हैं।
कहा कि शरीर के जिस भी अंग में फाइलेरिया का असर दिखता है, उसकी नियमित साफ-सफाई बेहद जरूरी है। इससे त्वचा के ऊपरी हिस्सों में संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। इस दौरान ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर सुबोध दुबे, एएनएम प्रमिला देवी, आशा कार्यकर्ता शोभा, संयोगिता, नीतू, सुनीता, फाइलेरिया नेटवर्क सदस्य और मरीज मौजूद रहे।