गोरखपुर जीएसटी एसआईटी ने एक अप्रैल को मारा था छापा
छापे के दौरान बंद फार्म से माल मंगा कर चोरी का हुआ था खुलासा
छापे के दौरान व्यापारी ने 44 लाख रुपये कर के रूप में कराया था जमा
एक हफ्ते पहले भी आदित्य विजन पर हुई थी छापामारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लगने के बाद से जीएसटी एसआईटी की टीम लगातार कर चोरी करने वालों पर नकेल कस रही है। देवरिया शहर की बात करें तो जीएसटी एसआईटी की टीम दो बार छापा मार चुकी है।
पहली बार एक अप्रैल को हुई कार्रवाई के दौरान सरिया कारोबारी को कर चोरी करते हुए पकड़ा था। कर चोरी मामले में छापा मारने के दिन ही कारोबारी ने 44 लाख रुपये कर के रूप में जमा कराया था। इसके बाद दो दिन पहले व्यापारी ने कर के रूप में साढ़े 11 लाख रुपये और जमा किए हैं। इस तरह सरिया कारोबारी कर के रूप में साढ़े 55 लाख रुपये जमा कर चुका है।
इधर, सरिया कारोबारी के बाद एक सप्ताह पहले आदित्य विजन में भी छापा मारा गया था। इसके बाद जिले के वैसे कारोबारी जो कर चोरी करते है उनमें खलबली मची हुई है।
देवरिया शहर के रघवापुर का एक व्यापारी बोगस फर्म के नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहा था। इसकी जानकारी होने पर करीब एक वर्ष से राज्य कर विभाग की टीम जांच कर रही थी। टीम की जांच व डाटा एनालिसिस करने पर यह प्रकाश में आया कि फर्म द्वारा वैध कारोबार किया जा रहा है, लेकिन कैश के रूप में कोई कर जमा न करके मात्र आईटीसी के माध्यम से ही कर सेटऑफ किया जाता है। इसके बाद टीम ने सोमवार को मौके पर पहुंच जांच की। व्यापारी ने स्वेच्छा से 44 लाख रुपये का कर जमा किया। जांच में पाए गए संदिग्ध अभिलेखों व प्रपत्रों को कर विभाग की टीम सीज कर जांच में जुट गई।
राज्य कर विभाग के विशेष अनुसंधान शाखा रेन्ज-बी, गोरखपुर के केन्द्रीय क्षेत्राधिकार में पंजीकृत आयरन एवं स्टील से संबंधित फर्म जो देवरिया के रघवापुर में स्थित है। उसके डाटा एनालिसिस पर पाये गये प्रतिकूल तथ्यों के चलते उपायुक्त राज्य कर, रेन्ज-बी, गोरखपुर सुनील कुमार वर्मा एवं संयुक्त आयुक्त राज्य कर रेन्ज-ए, उदित नरायण सिंह करीब एक वर्ष से रेकी कर रहे थे। सिंह ने मुखबिरों का जाल भी फैलाया था। साथ ही डाटा एनालिसिस करवाया था।
डाटा एनालिसिस करवाने पर यह तथ्य प्रकाश में आया कि फर्म द्वारा वैध कारोबार करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है। लेकिन कैश के रूप में कोई कर जमा न करके मात्र आईटीसी के माध्यम से ही कर सेटऑफ किया जा रहा है।
बिना प्रपत्रों व बिना कर चुकाए हो रही थी खरीद-बिक्री
टीम के सदस्यों को मुखबिरों से यह सूचना प्राप्त हुई कि वैध कारोबार की आड़ में बिना प्रपत्रों के भी माल की बिना कर चुकाये खरीद-बिक्री की जा रही थी।
जांच के बाद अपर आयुक्त ग्रेड-1, गोरखपुर जोन गोरखपुर विमल कुमार राय के निर्देश अपर आयुक्त ग्रेड-2, राज्य कर गोरखपुर जोन गोरखपुर संजय कुमार ने 31 मार्च को उपायुक्त राज्य कर, रेन्ज-बी, गोरखपुर सुनील कुमार वर्मा के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। एक अप्रैल की सुबह 11 बजे से छह बजे तक फर्म की जांच हुई थी।
जांच के दौरान व्यापार स्थल पर भौतिक रूप से उपलब्ध माल का सत्यापन व्यापारी नहीं करा सका, जिसके कारण पाये गये माल को जब्त करते हुए फर्म की अभिरक्षा में सुरक्षित रखने के लिए दे दिया गया। परिसर में खड़े बिहार के ट्रक पर एचआर शीट लोड थी। इस संबंध में व्यापारी को प्रपत्र प्रस्तुत नहीं कर सके थे। इस वाहन को ऑनलाइन चेक करने पर यह पता चला कि इस पर ई-वे बिल अपलोड है, लेकिन वह संबंधित फर्म से न होकर किसी अन्य फर्म के नाम से प्रदर्शित हो रहा था। प्रपत्रों के सत्यापन के वाहन में उपलब्ध माल मय वाहन की जब्ती की कार्रवाई करते हुए इसे व्यापारिक अभिरक्षा में सुरक्षित रखने के लिए दे दिया गया था।
जांच के दौरान पाए गए संदिग्ध अभिलेखों व प्रपत्रों को सीज करते हुए अग्रिम जांच के लिए कार्यालय लाया गया, जिसकी जांच की जा रही है। इस दौरान व्यापारी ने स्वेच्छा से 44 लाख रुपये कर जमा कर दिया था। दो दिन पहले कारोबारी ने करीब साढे़ 11 लाख रुपये और कर के रूप में जमा करवाया है। कारोबारी दो बार में अब तक करीब साढ़े 55 लाख रुपये कर के रूप में जमा कर चुका है।
सरिया कारोबारी के बाद आदित्य विजन पर मारा गया छापा
एक अप्रैल को सरिया कारोबारी के यहां छापेमारी के एक सप्ताह बाद जीएसटी एसआईटी की टीम ने शहर के भटवलिया चौराहे पर स्थित आदित्य विजन संस्था में छापा मारा था। करीब आठ घंटे चली कार्रवाई में चार सदस्यीय टीम ने कई साक्ष्य जुटाए थे। साथ ही बंद हो चुकी फॉर्म से खरीदारी कर जीएसटी की चोरी करने का मामला प्रकाश में आया था।
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