दूध कम होने की अफवाह के चलते टीका लगवाने से कतरा रहे पशुपालक
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पोखरभिंडा गांव निवासी रामप्रसाद की गाय को 15 दिन पहले रात के समय अचानक तेज बुखार आया। गले में सूजन थी। घरड़-घरड़ की आवाज आ रही थी। रामप्रसाद सामान्य बुखार समझकर घरेलू इलाज में जुट गए। दूसरी दिन गाय की मौत हो गई। ऐसा ही वाकया रामपुर गांव निवासी केदार यादव के साथ हुआ। उनकी गाय भी बीमार होने के 48 घंटे में ही मर गई। समय पर डाॅक्टर नहीं बुलाने के कारण बीमारी की पुष्टि नहीं हो पाई। पर लोग गलघोटू की आशंका जता रहे हैं।
गलघोटू ऐसी बीमारी है जो पशुपालकों को समझने का मौका नहीं देती। एक से दो दिन में ही पशुओं की जान चली जाती है। यह बीमारी ज्यादातर बरसात के समय शुरू होती है। फिलहाल टीकाकरण ही इससे बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके लिए एक माह से पशुपालन विभाग जिले भर में टीकाकरण अभियान चला रहा है। करीब 4.78 लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। आधे से अधिक पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। कुछ पशु पालक जागरूकता के अभाव में पशुओं को टीका नहीं लगवा रहे। पशु चिकित्सक अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि लोगों में अफवाह है कि टीका लगवाने से पशुओं का दूध कम हो जाता है। जबकि इस तरह की कोई बात नहीं है। टीकाकरण पशुओं के लिए बीमारी से सुरक्षा कवच का काम करता है।
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गलघोटू के लक्षण
गलघोटू रोग में अचानक से तेज बुखार हो जाता है। पशु लार बहाने लगते हैं। गले में सूजन होने से सांस लेने में पशुओं को तकलीफ होती है। खाना पीना बंद कर पशु सुस्त हो जाते हैं। समय पर इलाज न होने की वजह से छह से 48 घंटे में पशु की मौत हो जाती है।
वर्जन
इस रोग से बचाव करने के लिए बीमारी से पहले पशुओं का टीकाकरण ही प्रभावी उपाय है। प्रभावित पशु के साथ बाड़े में जरूरत से अधिक जानवर नहीं रखना चाहिए। फिलहाल जनपद में इस साल गलघोंटू से एक भी पशु के मौत की पुष्टि नहीं हुई है। लक्षण दिखते ही पशु पालकों को चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। - एके वैश्य, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी