भाजपा ने चौथी बार भी कमलेश पर लगाया है दांव
बरहज। बांसगांव सुरक्षित लोकसभा संसदीय सीट पर कांग्रेस और भाजपा का शुरू से ही दबदबा रहा है। लगातार तीन बार से भाजपा से कमलेश पासवान निर्वाचित हुए हैं। इस बार भी पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए टिकट देकर मैदान में उतारा है। हालांकि, इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी का आज तक खाता नहीं खुल सका है। बांसगांव सुरक्षित संसदीय सीट पर पिछले 2019 के लोकसभा चुनाव में कमलेश पासवान ने 5,44,434 पाकर बसपा के सदल प्रसाद 3,93,205 को हराया था। जबकि 2009 और 2014 की मोदी लहर में जबरदस्त जीत हासिल की थी। 1957 और 1962 में कांग्रेस से महादेव प्रसाद, 1971 में रामसूरत, 1980, 1984, 1989 और 2004 में महावीर प्रसाद ने जीत हासिल की थी। 1991, 1998, 1999 में भाजपा से राजनारायन, जबकि 1996 में समाजवादी पार्टी से कमलेश पासवान की मां सुभावती देवी साइकिल दौड़ाने में कामयाब रहीं। बसपा का अब तक खाता नहीं खुला है। दो बार बसपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे हैं। संवाद इंसेट में-
करीब 24 लाख मतदाता करेंगे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला
बरहज। बांसगांव सुरक्षित संसदीय सीट से करीब 24 लाख मतदाता चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। गोरखपुर जनपद के बांसगांव संसदीय सीट में जिले के दो विधानसभा क्षेत्र आते हैं। बरहज और रुद्रपुर विधानसभा में 23,66,372 वोट में 12,39,983 पुरुष और 11,26,300 महिला वोटर हैं। वहीं, 89 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। दोनों विधानससा क्षेत्रों में करीब 12 हजार मतदाता 80 वर्ष से ऊपर के हैं। बांसगांव में पुरुष साक्षरता दर 82.88 और महिला 59.89 है।
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ये कर चुके हैं संसद में बांसगांव का प्रतिनिधित्व
बरहज। बांसगांव सुरक्षित लोकसभा सीट से एक महिला सहित अन्य पुरुषों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। 1957 और 1962 में कांग्रेस से महादेव प्रसाद, 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से मोलहू प्रसाद, 1971 में कांग्रेस के रामसूरत, 1977 में भारतीय लोकदल के फिरंगी प्रसाद विशारद, 1980, 84, 89 में कांग्रेस से महावीर प्रसाद, 1991 में भाजपा से राजनारायन पासी, 1996 में सुभावती देवी, 1998 में भाजपा के राजनारायन पासी, 2004 में कांग्रेस के महावीर प्रसाद, 2009, 2014 और 2019 में भाजपा से कमलेश पासवान सांसद चुने गए हैं।