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Deoria News: अविनाश की गर्दन पर चढ़ा था कंबाइन का पहिया, डंठल के ढेर में छिप गया था शव

Fri, 12 Apr 2024 12:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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लार थाना क्षेत्र मईल के गहिला गांव में कंबाइन से गिरकर किशोर की मौत का मामला, पंचनामा करके शव परिजनों को सौंपा
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संवाद न्यूज एजेंसी
लार। गेहूं की फसल की कटाई करते समय चलती कंबाइन से उतरते समय बुधवार की दोपहर एक किशोर की मौत हो गई थी। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार किया तो मौके पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा करके शव परिजनों को सौंप दिया। देर रात भागलपुर के काली चरण घाट पर किशोर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मईल थाना क्षेत्र के गहिला निवासी अविनाश यादव (17) पुत्र केशव यादव कक्षा आठवीं में पढ़ता था। उसके ही गांव के एक व्यक्ति की कंबाइन लार थाना क्षेत्र के रामनगर गांव में गेहूं की कटाई कर रही थी। इसी बीच चालक के बगल में बैठे अविनाश को प्यास लगी। इस पर वह बायीं तरफ लगी सीढ़ी के सहारे चलती कंबाइन से उतर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसी बीच कंबाइन को झटका लगा तो उतरते समय अविनाश का हाथ सीढ़ी से छूट गया। हाथ छूटने के बाद वह कंबाइन के पिछले पहिया के नीचे आ गया। गिरते ही उसकी गर्दन पर कंबाइन का पिछला बायां पहिया चढ़ गया। कंबाइन के शोर के कारण अविनाश के चीखने की आवाज नहीं सुनाई दी। अविनाश कंबाइन से निकल रहे गेहूं के डंठल के ढेर में ढक गया। शोर के कारण इसकी भनक चालक को भी नहीं लगी।
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कुछ दूर पर गेहूं कटवाने का इंतजार कर रहे लोगों की नजर इस पर पड़ी तो वे तुरंत दौड़ पड़े। डंठल का ढेर हटाकर देखा तो उसके नाक, कान और मुंह से खून बह रहा था। अविनाश ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया था। संतुष्टि के लिए लोग सीएचसी लार लेकर पहुंचे। जहां डाॅक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इधर, आनन-फानन परिवार के लोग शव को गहिला लेकर पहुंचे।
इसी बीच किसी ने घटना की सूचना पुलिस को फोन पर दी। जानकारी होते ही सीओ बरहज अविनाश के घर पहुंच गए। पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजने की तैयारी कर रही थी। इसी बीच किशोर के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कराकर शव को परिजनों को सौंप दिया। देर रात किशोर के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। भागलपुर के काली चरण घाट पर उसके बड़े भाई ने मुखाग्नि दी। यह देखकर मौजूद लोग फफक पड़े। घटना के बाद से ही गांव का माहौल गमगीन है।

मृतक किशोर के परिवार के लोग किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं चाह रहे थे। शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर रहे थे। इस लिए शव का पंचनामा कराकर परिजन को सौंप दिया गया।
-आदित्य कुमार गौतम, सीओ बरहज

किशोर की मौत के बाद गहिला गांव में नहीं जले चूल्हे
अविनाश यादव की कंबाइन के पिछले पहिये की चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी जानकारी मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। तकरीबन पांच बजे शव गहिला स्थित उसके दरवाजे पर पहुंचा तो लोगों का जमावड़ा लग गया। चीख-पुकार से गांव का माहौल गमगीन हो गया। गांव के किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले। देर रात दस बजे के करीब बड़े भाई ने भागलपुर के काली चरण घाट पर अपने अनुज को कांपते हाथों से मुखाग्नि दी।

गांव में फैले सन्नाटे को चीर रही थीं महिलाओं की चीखने की आवाजें
अविनाश की मौत के बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी आसपास के गांवों के लोगों व रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। सभी यह जानना चाह रहे थे कि आखिर हादसा कैसे हुआ। दरवाजे पर मौजूद लोग इसकी जानकारी लोगों को दे रहे थे। वहीं, घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। चारों तरफ सन्नाटे को चीरते हुए महिलाओं की चीख-पुकार की आवाजे सुनाई पड़ रही थी। वहीं, अविनाश की मां बेटे को याद कर बदहवास हो जा रही थी। पास में बैठीं महिलाएं उनकाे संभाल रही थीं।

चुपके से ट्राॅली में बैठ कर आ गया था रामनगर
अविनाश कक्षा आठवीं में पढ़ता था। वह घर पर ही रहता था। बृहस्पतिवार को घर से जाने की बात कहकर निकला। इसपर परिवार के लोगों ने जाने से मना किया। लेकिन उसने बात नहीं मानी। इसके बाद कंबाइन के पीछे आ रही भूसा बनाने वाली ट्राॅली के अंदर चुपके से घुस गया। करीब नौ बजे सुबह रामनगर जब ट्राॅली पहुंची तो अंदर से निकलते देखकर ट्रैक्टर चालक ने उसे फटकार लगाकर गांव जाने की बात कही। लेकिन वह नहीं गया। इसके बाद कंबाइन पर चढ़ने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसके चालक ने भी उसे छोटी उम्र होने की बात कहकर समझाकर दो बार उतारा। लेकिन चालक की बात को भी नहीं माना। इसके चार घंटे बाद पिछले पहिये के नीचे आ गया। इससे उसकी मौत हो गई।
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बेटे को वर्दी में देखने की इच्छा रह गई अधूरी
बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की बाधा ना आए, इसके लिए पिता केशव यादव हरियाणा में रहकर मजदूरी करते हैं। वह छोटे बेटे को वर्दी में देखना चाहते थे। वह भी पिता का सपना पूरा करने के लिए पढ़ाई कर रहा था। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता को क्या पता कि जो सपना पूरा करने के लिए मेहनत कर बेटे को पढ़ा रहा हूं, वह अधूरा ही रह जाएगा।
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