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विपरीत परिस्थितियों में घबराएं नहीं, डटकर करें मुकाबला

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विपरीत परिस्थितियों में घबराएं नहीं, डटकर करें मुकाबला
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ताइक्वांडो की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रियंका एवं राष्ट्रीय खिलाड़ी संस्कृति ने छात्राओं की जिज्ञासाओं को किया शांत
ध्रुव एजुकेशनल एकेडमी अगस्तपार में आयोजित हुआ आत्मसुरक्षा शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया/सोनूघाट। ताइक्वांडो की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रियंका कुमारी ने कहा कि कभी विपरीत परिस्थिति में रहें तो घबराएं नहीं। हमेशा असुरक्षित स्थान पर जाने से बचें। पढ़ाई करें तो आवाज जरूर निकालें, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और कुछ नया सीखने को मिलेगा।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चल रहे अपराजिता अभियान के तहत बृहस्पतिवार को ध्रुव एजुकेशनल एकेडमी अगस्तपार में आयोजित आत्मसुरक्षा शिविर में वह उपस्थित 140 से अधिक छात्राओं को संबोधित कर रही थीं।
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ताइक्वांडो की तीन बार नेशनल खिलाड़ी रह चुकीं संस्कृति कुमारी के साथ प्रियंका ने छात्राओं को पंच बनाने का सही तरीका, आत्मसुरक्षा के लिए स्कूल बैग, पेन, हेयर पिन, पानी की बोतल कैसे हथियार बन सकते हैं, इसका प्रयोग करके बताया और इसकी व्यावहारिक जानकारी दी।
प्रियंका ने कहा कि आत्मसुरक्षा के लिए मानसिक और शारीरिक सुरक्षा दोनों जरूरी है। अपराजिता का मतलब ही है जो कभी पराजित न हो। बोल के पढ़ने से आपकी एकाग्रता भंग नहीं होती। आगे कहा कि कोई आपको गलत तरीके से छू रहा है या अच्छी भावना से इसका अंदाज आपको हो जाता है। लगे कि कहीं कोई हमला करने की फिराक में है तो सबसे पहले खुद का बचाव करें। दोनों खिलाड़ियों ने मौके पर आत्मसुरक्षा के विभिन्न आयामों का प्रयोग करके दिखाया और छात्राओं से भी इसे कराया और उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।
स्कूल प्रबंधक ओंकार नाथ तिवारी ने आभार जताया। इस दौरान प्रधानाचार्य राजन तिवारी, भूपेश सिंह, बृजनंदन मिश्र, संत कुमार तिवारी, सत्येंद्र सिंह, पुरुषोत्तम यादव, आनंद प्रजापति, प्रतिमा तिवारी, छाया श्रीवास्तव, रानी तिवारी आदि मौजूद रहीं।
स्पीकअप
अब खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दीदी लोगों ने जो भी करके बताया, उसे अपने जीवन में उतारेंगे। ऐसा शिविर आगे भी लगना चाहिए, ताकि अन्य छात्राएं भी इसका लाभ उठा सकें।
-अदिती तिवारी
हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। पेन, बैग और पानी वाला बोतल भी हथियार बन सकता है, यह कभी सोचा नहीं था। अब आपात स्थिति में यहां सीखें दांव को आजमाएंगे। दूसरों को भी बताएंगे।
-रीति कुमारी
इस प्रशिक्षण सत्र का हिस्सा बनना यादगार रहा और इससे हमारे अंदर का डर खत्म हुआ है। दोनों दीदी लोगों ने जो बताया, वह काफी अच्छा लगा। अब इन सुरक्षा के उपायों को आजमाएंगे भी।
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-आयशा खातून
जहां गलत हो, अब उसका खुलकर विरोध करना सीख गए हैं। सभी छात्राओं व महिलाओं को आए दिन ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जिसे वह खुलकर बता भी नहीं सकती।
-अंशिका यादव
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