समय का पालन नहीं कर पा रहीं एंबुलेंस
रेस्पांस टाइम बेमतलब, एंबुलेंस के इंतजार में बिगड़ रही मरीज की हालत
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले में एंबुलेंस सेवा लचर है। बुलाने के बाद आधे से एक घंटे देर से एंबुलेंस पहुंच रही है। चालक दूर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में मरीज को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। इससे तीमारदारों व मरीजों को दिक्कत हो रही है। वहीं, कुछ एंबुलेंस की हालत ठीक न होने के कारण उनकी रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है। इससे रेस्पांस टाइम बेमतलब साबित हो रहा है।
जनपद में मरीजों की सुविधा के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा है। उन्हें अस्पताल लाने तथा घर ले जाने के लिए 73 एंबुलेंस हैं। इसमें 102 नंबर 38 तथा 108 नंबर की 35 एंबुलेंस हैं। इन एंबुलेंस का रेस्पांस टाइम 11 मिनट है। कोई व्यक्ति जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस के बुलाता है तो उसे निर्धारित समय में पहुंचकर मरीजों को घर से अस्पताल पहुंचाना है, लेकिन जिले में नियम का पालन नहीं हो रहा है।
तीमारदार के मोबाइल पर फोन करने के आधे से एक घंटे में एंबुलेंस पहुंच रही है। इसके कारण मरीजों को इस सुविधा का ठीक से लाभ नहीं मिल पा रहा है। एंबुलेंस के इंतजार में तबीयत और बिगड़ जा रही है। वहीं, समय से न पहुंचने के कारण घर पर व एंबुलेंस में प्रसव भी हो जा रहा है। ऐसे में लोग निजी साधन से मरीज को अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
फोटो
विकास खंड भटनी के धरमखोर दुबे के वृद्ध पिता रमाशंकर यादव को सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजनों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया। 45 मिनट इंतजार किए। परेशानी बढ़ती देखकर बाइक से लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे। वहां वाहन से उतरते ही फर्श पर लेट गए। किसी तरह चिकित्सक के पास पहुंचाया गया।
- फोटो
पड़री अनिरुद्ध के संदीप विश्वकर्मा को पांच माह पहले बच्चा हुआ है। वह नवजात व उसकी मां को दिक्कत होने पर अस्पताल लाने के लिए फोन लगाए। बुलाने के आधे घंटे बाद एंबुलेंस घर पहुंची। इसके बाद मां व नवजात को लेकर अस्पताल आए।
- फोटो
भटनी के बाबू धरमखोर की एक महिला को शुक्रवार को घर पर प्रसव हुआ था। नवजात के न रोने पर परिजन भटनी सीएचसी पहुंचे। यहां से डॉक्टर ने रेफर कर दिया। आशा के फोन करने के 45 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची। जबकि उसे मात्र पंद्रह किमी से आना था।
फोटो
सदर ब्लॉक के शिवपुर धनौती कला की बबिता यादव को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन एंबुलेंस के लिए फोन किए। करीब एक घंटे इंतजार करने के बाद एंबुलेंस पहुंची। उनके आने में देरी से परिजन परेशान थे।
कबाड़ हो चुकी हैं कई एंबुलेंस
कई एंबुलेंस लेंस कबाड़ हो चुकी हैं। जिला अस्पताल में पांच एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। धूप, बारिश में वे खुले में सड़ रही हैं। उनके अधिकांश पार्ट्स गायब हैं या खराब हो चुके हैं।
अस्पताल परिसर में खड़ी थीं चार एंबुलेंस
जिला अस्पताल परिसर में विभिन्न स्थानों पर चार एंबुलेंस दिन के बारह बजे खड़ी थीं। चालक व कर्मी आराम से बैठकर बात कर रहे थे।
एक मरीज के पहुंचाने पर एंबुलेंस कर्मी ने मांगे रुपये
प्रसव पीड़ा से परेशान एक गर्भवती को लेकर परिजन एंबुलेंस से जिला महिला अस्पताल पहुंचे। एक कर्मी गेट ने खोला। गर्भवती व परिजनों के उतरने के बाद अंदर जाने का रास्ता बताया। इसके बाद परिजन से सौ रुपये की मांग की और उनसे रुपये लेकर निकल गया।
कोट
कई बार हमने देरी से पहुंचने की बात को बैठकों में कहा है। रेस्पांस टाइम का पालन हो, इसके लिए सेवा प्रदाता को पत्र भेजा गया है। हर हाल में समय का पालन होना चाहिए।
-डॉ. सुरेंद्र सिंह, प्रभारी सीएमओ