प्रस्ताव ठंडे बस्ते में, अब महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुशीनगर में खुलेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद में कृषि विश्वविद्यालय की मांग दशकों से चली आ रही है। शासन ने कृषि विश्वविद्यालय के लिए भूमि तलाशने के लिए जिला प्रशासन को कहा था। जिलाधिकारी ने करीब पांच जगह की जमीन का पूरा ब्योरा शासन को भेज दिया था, ताकि कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का रास्ता साफ हो जाए।
बुधवार को प्रदेश के बजट में चार कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लिए बजट में धन का प्रावधान किया गया है। इसमें महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुशीनगर के लिए 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि आचार्य नरेंद्र देव कृषि प्रौद्योगिकी अयोध्या के महाविद्यालय आजमगढ़ और गोंडा कृषि महाविद्यालय की सुध भी ली गई है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के कृषि कॉलेज बीआरडीपीजी के हिस्से में कुछ भी नहीं आया है। गौर करने वाली बात तो यह है कि बीआरडीपीजी कॉलेज कभी आगरा विश्वविद्यालय का हिस्सा हुआ करता था। यह सबसे पुराना कॉलेज है। एक समय ऐसा था कि गोरखपुर मंडल में यह इकलौता महाविद्यालय था, जहां एमएससी एजी की पढ़ाई होती थी। करीब दो माह पहले शासन ने बीआरडीपीजी कॉलेज को लेकर काफी गंभीरता दिखाई थी। कृषि विश्वविद्यालय स्थापना के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। जिला प्रशासन ने बाकायदे जिला प्रशासन ने मानक के अनुरूप भूमि भी तलाश ली थी लेकिन बजट में पूरा मामला फिसल गया और कुशीनगर जिले में स्थापित होने की घोषणा कर दी गई। इसके बाद से बीआरडीपीजी कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी उदास हो गए हैं।
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बीआरडीपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. शरद चंद मिश्र ने बताया कि महाविद्यालय के कृषि विश्वविद्यालय बनने की सभी को उम्मीदें थीं। करीब 50 साल से इसकी मांग की जा रही थी। कृषि महाविद्यालय के नाम यह कॉलेज भी खोला गया था। वर्तमान में 85 शिक्षकों का स्टाफ भी कार्यरत है जो गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध अन्य महाविद्यालयों से सर्वाधिक है। कई शिक्षक तो इसी आस में यहां से अपना स्थानांतरण भी नहीं करा रहे थे। जमीन की कमी के कारण उम्मीदों को झटका लगा है। हालांकि, जब मेडिकल कॉलेज खुल सकता है तो कृषि विश्वविद्यालय भी यहां ही खुलता तो जिले के विकास की नई राह खोलता। इसके लिए यहां के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों व जनप्रतिनिधियों ने भी काफी प्रयास किया।