देवरिया। अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह के परिवार के सदस्यों पर हुए हमले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान बंदी वाहनों से कचहरी पहुंचे 179 बंदियों की पेशी नहीं हो सकी। साथ ही मुकदमे की पैरवी के लिए दूर-दराज क्षेत्र से आए लोगों को लौटना पड़ा। इससे पहले अधिवक्ताओं ने बैठक कर आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।
सदर कोतवाली के कठिनइया गांव निवासी अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह के परिजनों पर हमले के बाद पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसको लेकर सोमवार से ही अधिवक्ता लामबंद हैं। मंगलवार की सुबह से ही दीवानी कचहरी के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। उन्होंने संघ भवन में बैठक आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए हुंकार भरी। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए गेट पर पहुंचकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं की हड़ताल को देखते हुए कचहरी के आसपास काफी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे। मंगलवार को कचहरी में 226 बंदियों की पेशी होनी थी। करीब 11 बजे 179 बंदियों को लेकर वाहन पहुंचा। अधिवक्ताओं के कारण पुलिस ने वाहन गेट के अंदर नहीं जा सके। काफी इंतजार के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच बंदियों को बिना पेश कराए जेल के लिए रवाना कर दिया। दो दिन की हड़ताल से अब तक 192 बंदियों को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका है। इस दौरान अध्यक्ष अशोक दीक्षित, लल्लन मिश्रा, शक्तिधर पांडेय, वीरेंद्र सिंह, अरविंद साहनी, नरेंद्र यादव, अर्जुन यादव, अटल सिंह, मनोज राय, सुभाष चंद राव, सिंहासन गिरि, मनोज मिश्रा, आरपी कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
सीओ सदर श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार को 226 बंदियों की पेशी होनी थी 179 बंदियों को पेशी के लिए ले जाया गया था, लेकिन अधिवक्ताओं के प्रदर्शन के कारण बंदी वाहन कचहरी परिसर में नहीं प्रवेश कर सके।