गौरी बाजार थानाक्षेत्र के बौरडीह तिवारी गाँव निवासी बृजेन्द्र मणि उर्फ राजु मणि की मौत के बाद व
बौरडीह तिवारी गांव में हुई घटना, चश्मे की दुकान पर काम करता था युवक
संवाद न्यूज एजेंसी
बैतालपुर। कूलर में पानी डालते समय करंट की चपेट में आने से बौरडीह तिवारी गांव में एक व्यक्ति की रविवार की रात मौत हो गई। स्टील के जग से कूलर में पानी भरते समय हादसा हुआ। जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। परिवार के मुखिया की मौत के बाद से पूरा परिवार दहाड़े मारकर रोने लगा।
गौरी बाजार थानाक्षेत्र के बौरडीह तिवारी गांव निवासी बृजेंद्र उर्फ राजू मणि (43) जनपद मुख्यालय स्थित चश्मा की एक दुकान पर काम करते थे। रविवार को देर शाम घर आने पर भोजन करने के बाद बिस्तर के बगल में कूलर चालू कर सो गए। गर्मी लगने पर रात में उनकी नींद खुली तो उन्होंने देखा कि कूलर में पानी खत्म हो गया था। इसके बाद वह कूलर का स्वित ऑफ कर स्टील के जग से पानी डालने लगे। इसी बीच करंट की चपेट में आ गए। बगल के कमरे में सोए परिजनों ने जब चिल्लाने की आवाज सुनी तो दौड़कर पहुंचे। घरवालों ने देखा कि वह कूलर में सटे थे। उन्हें किसी तरह अलग किया गया। हालत गंभीर देख परिजन उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक बृजेंद्र मणि अपने पिता के इकलौते पुत्र थे। परिवार में बृजेंद्र ही एकमात्र कमाउ सदस्य थे। उनकी मौत से मां सरस्वती देवी, पत्नी रागिनी, दो बेटियों सोनी व तृप्ति और इकलौते बेटे आयुष मणि सदमे में हैं। गौरीबाजार के थाना प्रभारी नवीन कुमार सिंह ने बताया कि रात में कूलर में पानी भरते समय करंट लगने से मौत हुई है। जानकारी होने पर पुलिस भी पहुंची थी।
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बेटियों की शादी व बच्चे को पढ़ाने का सपना रह गया अधूरा
बैतालपुर। बृजेन्द्र मणि की मौत ने आसपास के गांव के लोगों को झकझोर दिया। गांव वाले बताते हैं कि वह मिलनसार स्वभाव के थे। उनकी दो बेटियां 24 वर्षीय बेटी सोनी, 22 वर्षीय बेटी तृप्ति और बेटा 17 वर्षीय आयुष मां से लिपटकर रोते-रोते बदहवास हो जा रहे थे। बृजेंद्र की मां सरस्वती देवी का हाल बुरा था। वह रोते हुए कहे जा रही थीं कि उनके आगे ही बेटा चला गया। बेटे के सारे अरमान धरे के धरे रह गए। बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी उन्हें के कंधों पर थी। वह अकेले कमाई कर परिवार का खर्चा चला रहे थे। उधर उनकी पत्नी रागिनी की हालत बहुत खराब थी। बार बार बेहोश होने के चलते उन्हें पानी का छींटा मारना पड़ रहा था।
रागिनी ने बताया कि वह बड़ी बेटी सोनी की शादी ढूंढ रहे थे। उनके बच्चों का सहारा छीन कर भगवान ने उनके सारे सपने तोड़ दिए। उनका सपना था कि दोनों बेटियों की शादी करने के बाद अपने बेटे को अच्छी पढ़ाई के लिए बाहर भेजेंगे।