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कुदरत के आगे बेबस दिख रहे बाढ़ पीड़ित

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बरहज। घाघरा के जलस्तर में उफान से तटवर्ती क्षेत्रों के आधा दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। जलस्तर में आई 90 सेंटीमीटर की कमी के बाद भी समस्याएं बरकरार हैं। पानी घटने के बाद हो रही मूसलाधार बारिश से लोग कुदरत की मार झेल रहे हैं। करीब 20 दिन पहले घाघरा में दोबारा आए सैलाब से परसियां-विशुनपुर देवार सहित भदिला प्रथम, कटइलवा, नौका टोला, कोलखास के विस्थापितों का टोला, ज्ञानकोल आदि गांव पानी से घिर गए थे। प्रशासन ने पीड़ितों की आवाजाही के लिए 14 सुरक्षा चौकियों को अलर्ट रखने के साथ 44 नावें लगा रखी थीं। पानी से घिरे होने के कारण लोग बाढ़ का पानी पीकर जीवन यापन कर रहे थे। पिछले दो दिनों से आई जलस्तर में कमी से जहां लोगों ने राहत महसूस किया वहीं शुक्रवार की सुबह से हो रही बारिश से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उग्रसेन सेतु के पास रामजानकी मार्ग के किनारे टेंट में रह रहे पीड़ितों के पशु भी भूखे पेट गुजारा कर रहे हैं। पशु विभाग की ओर से चारा की गाड़ी आने की सूचना पर ग्रामीण दौड़ पड़े। पीड़ितों को पशुओं के पांच दिन के भोजन के लिए 5-5 किलो भूसा दिया गया। वहीं, बाढ़ से घिरे गांव भदिला प्रथम और धनया कुंद महाल टोला में पूर्व जिला पंचायत सदस्य कामिल शेख ने राहत सामग्री वितरित किया।
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