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Deoria News: गुजर गए 40 साल... मिली तारीख पर तारीख, दूसरी पीढ़ी में भी निपटारे की उम्मीद नहीं

Fri, 04 Aug 2023 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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कलेक्ट्रेट में  तारीख देखते वादकारी।संवाद
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देवरिया। जिले में जमीन का विवाद निस्तारण करना अफसरों के लिए बहुत ही मुश्किल साबित हो रहा है। चार दशक से शुरू हुए मुकदमे के निस्तारण के लिए वादी अब भी चक्कर काट रहे हैं। कइयों की दूसरी पीढ़ी भी मुकदमे की तारीख पर तारीख देख रही है। इसके बाद भी निस्तारण की उम्मीद नहीं है। अब तो तहसील की अदालतों में तारीख देखने की आदत सी बन चुकी है। हालत यह है कि राजस्व अदालतों में करीब 20 हजार वाद लंबित हैं।
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सोंदा गांव निवासी गुरु प्रसाद ने बताया कि 33 साल दीवानी में और सात साल राजस्व न्यायालय में लग गए। पिता के निधन के बाद अब वह मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। बंटवारे का 116 दाखिल किया है। हालत यह है कि 33 साल दीवानी न्यायालय में और सात साल से राजस्व न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं। इसके बावजूद भी निपटारा नहीं हुआ। अभी तक तीन सौ से अधिक तारीख पर हाजिर हो चुके हैं। इसके बाद भी निस्तारण की उम्मीद नहीं दिख रही है। बंटवारा तो हुआ नहीं, लेकिन हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। इसको लेकर अफसोस भी होता है। इसी तरह संजू देवी ने बताया कि तारीख मिलने पर न्यायालय आती हूं। करीब 25 वर्ष से मुकदमा लड़ रही हूं, लेकिन फैसला नहीं हुआ। पति मुकदमा लड़ते-लड़ते गुजर गए। अब मेरा भी बुढ़ापा आ गया।
नियमों की बात करें तो राजस्व न्यायालय में हर अफसर को हर माह 15 से 20 मुकदमों का निस्तारण करना होता है। पर ऐसा न होने से मुकदमे का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। जिले में अगर लंबित वाद पर नजर डाली जाए तो सबसे अधिक बंटवारा, पैमाइश और नक्शा दुरुस्ती के हैं।
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कोट:
- 1980 से मुकदमा लड़ रहा हूं, लेकिन अभी तक फैसला नहीं हुआ है। बुढ़ापा आ गया। तारीख पर तारीख लड़ता रहा, लेकिन बंटवारा नहीं हुआ। इसके कारण हर तारीख पर आर्थिक नुकसान भी होता है और लौट भी जाता हूं।
श्याम देव, खोराराम

पिता मुकदमा लड़ते-लड़ते दुनिया छोड़ गए, लेकिन निस्तारण नहीं हुआ। अब मैं मुकदमा देख रहा हूं। अब भी निस्तारण की उम्मीद नहीं लग रही है। महीने में तीन से चार तारीख पड़ती है।
- गुरु प्रसाद, सोंदा

मुकदमे के बोझ से हांफ रहीं राजस्व की अदालतें, 20 हजार से अधिक मामले विचाराधीन
देवरिया। जिले की राजस्व अदालतों पर मुकदमे का बोझ बढ़ गया है। वादकारियों को तारीख पर तारीख मिल रही है। तहसीलों और जिला मुख्यालय तक वादकारी चक्कर लगा कर थक चुके हैं। एसडीएम, तहसीलदार तो अधिकतर समय सामान्य शिकायतों को निस्तारित करने में गुजार देते हैं। इसके कारण मुकदमों के निस्तारण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
राजस्व न्यायालयों में धारा 24, 116 के सबसे अधिक मामले लंबित पड़े हुए हैं। इसमें से तकरीबन 5200 वाद ऐसे हैं जो तीन से चार दशक से चले आ रहे हैं। इन मुकदमों की पैरवी करने वाले वादकारी मोटी रकम खर्च कर चुके हैं। कई ऐसे वादकारी हैं जो तीन सौ से चार सौ तारीख देख चुके हैं, लेकिन निस्तारण नहीं हुआ।

इन न्यायालयों में लंबित हैं इतने मुकदमे
- सदर तहसील में 1170 मुकदमे
- सलेमपुर तहसील में 1130 मुकदमे
- रुद्रपुर तहसील में 910 मुकदमे
- बरहज तहसील में 444 मुकदमे
- भाटपाररानी तहसील में 645 मुकदमे
- डीएम न्यायालय में 20 मुकदमे
- एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय में 83 मुकदमे
- एडीएम प्रशासन न्यायालय में 102 मुकदमे
- सीआरओ न्यायालय में 110 मुकदमे
- एएसडीएम प्रथम न्यायालय में 314 मुकदमे
- एएसडीएम द्वितीय न्यायालय में 244 मुकदमे
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कोट:
मुकदमों के लंबित होने का सबसे बड़ा कारण है अधिकारियों का कोर्ट में कम समय देना। उनका अधिकांश समय जनता दर्शन में बीत जाता है। इसके चलते मुकदमे लंबित अधिक हो रहे हैं। लक्ष्य निर्धारित कर मुकदमे का निस्तारण किया जाए तो लोगों को राहत मिलेगी।
- उमेश चंद्र मिश्रा, जिलाध्यक्ष, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन

- राजस्व वाद इन दिनों तेजी से निस्तारित किए गए हैं। कई अदालतों में एक ही महीने में 25 से 30 मुकदमों का निस्तारण किया गया है। प्रयास रहता है कि समय से सुनवाई कर सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुकदमे का निस्तारण कर दिया जाए।
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- रजनीश राय, सीआरओ
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