जिले में भी हैं 281 जर्जर परिषदीय स्कूल भवन
प्रधानाध्यापकों को देना होगा यहां पढ़ाई नहीं होने का प्रमाणपत्र
10 नवंबर तक देना है जर्जर भवनों में पढ़ाई व आवागमन न होने की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जनपद में भी ऐसे 281 जर्जर परिषदीय स्कूल भवन हैं, जो खतरे से खाली नहीं हैं। और अब भी यहां विद्यार्थी जान हथेली पर रखकर पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि 381 विद्यालय ऐसे हैं, जिनका ध्वस्तीकरण हो चुका है या इसकी प्रक्रिया चल रही है। इधर, महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने आदेश दिया है कि प्रधानाध्यापक अब यह प्रमाणपत्र देंगे कि चिह्नित जर्जर भवनों में पढ़ाई नहीं हो रही है। इसके बाद जिले स्तर पर भी इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
जनपद में वर्तमान में 2120 परिषदीय स्कूल हैं। जर्जर परिषदीय स्कूल भवनों में रोक के बावजूद कई जगह अब भी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। शिकायतों के बाद शासन ने गंभीर रुख अपनाया है। अब प्रधानाध्यापकों को यह प्रमाणपत्र देना होगा कि ऐसे भवनों में पढ़ाई नहीं हो रही है।
बीएसए हरिश्चंद्र नाथ ने शुक्रवार को बताया कि जर्जर स्कूली भवनों को चिह्नित कर एवं ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया भी चल रही है। अब तक जनपद में कुल 381 विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण एवं नीलामी प्रक्रिया करा ली गई है।
281 नए ऐसे चिह्नित विद्यालय भवन हैं, जिन्हें निष्प्रयोज्य घोषित किया गया है। इनका मूल्यांकन समिति की ओर से कराया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह पहल की जा रही है। शासन के आदेश के बाद ऐसे विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से वहां पढ़ाई न होने का प्रमाणपत्र लिया जाएगा।
रुद्रपुर क्षेत्र में सर्वाधिक हैं जर्जर स्कूल भवन
जिले में बनकटा में 32, लार दो, रामपुर कारखाना 22, बैतालपुर 11, पथरदेवा 15, देसही देवरिया 18, भलुअनी 20, रुद्रपुर 49, बरहज 16, तरकुलवा 14, गौरीबाजार 14, देवरिया सदर छह, भागलपुर छह, भटनी नौ, सलेमपुर 19, भाटपाररानी 24, नगर क्षेत्र देवरिया चार।