रुद्रपुर। बाढ़ प्रभावित दोआबा के 52 गांवों में बाढ़ पीड़ितों को 30 दिनों तक राहत पहुंचाने का सरकारी दावा हवाहवाई साबित हो रहा है। पीड़ितों में बंटने वाला राहत पैकेट आपदा के 12वें दिन ही समाप्त हो गया। किरासिन में खेल हो रहा है। आपदाग्रस्त किसी गांव में किरासिन नहीं पहुंचने से पानी से घिरे लोगों की रात अंधेरे में कट रही है। सोमवार को तेल को लेकर बैदा गांव के लोगों ने हंगामा किया। आरोप है कि पांच लोगों के परिवार को मिलने वाला राहत पैकेट का वितरण नियमानुसार नहीं हुआ। अधिकांश गांवों में आपदा के 14 दिन बीतने के बाद भी राहत पैकेेट नहीं पहुंचा। बंधों पर रात गुजार रहे लोगों को प्लास्टिक भी नसीब नहीं हुई। लेखपाल पीड़ितों में फटी हुई प्लास्टिक बांट दिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शासन के निर्देश पर 30 दिनों तक राहत पैकेट वितरित करना था। पांच लोगों के परिवार में 40 किलोग्राम के राहत सामग्री का पैकेट वितरित किया जाना है। इस पैकेट में सात दिन के लिए राशन तेल, मसाला व अन्य सामग्री है। तहसील प्रशासन के अनुसार आपदा शुरू होने के बाद अब तक 50 गांवों के 15671 परिवारों में एक बार राहत पैकेट वितरित किया जा चुका है। जबकि 30 दिनों में हर परिवार में कम से कम चार बार राहत पैकेट वितरित करने का निर्देश है। बाढ़ पीड़ित परिवार को पांच लीटर किरासिन देना है। किसी भी गांव में किरासिन वितरित नहीं किया गया। किरासिन को लेकर बैदा गांव के पीड़ितों ने हंगामा किया। गांव के दुर्गा, रामकिशुन, जगदीश, रामेश्वर आदि ने बताया कि दो लीटर किरासिन दिया जा रहा है, वह भी नहीं मिला। तहसीलदार सूर्यभान गिरि ने कहा कि 50 गांवों में एक बार राहत पैकेट बंट चुका है। राहत पैकेट आने पर दोबारा बंटेगा। हर परिवार में पांच लीटर किरासिन बंटेगा। किरासिन वितरण में लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। सपा के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह ने सरकारी राहत वितरण में घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने राहत पैकेट और किरासिन की जांच कराने की मांग की है।