आठ दिन से जिले में नहीं हो रही बारिश, तीखी धूप और बढ़ते तापमान से परेशान हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बादलों ने इस बार जिले वासियों से मुंह मोड़ लिया है। बाढ़ खंड के आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल के मुकाबले 125 मिलीमीटर बारिश कम हुई है। यहां जुलाई माह में औसत वर्षा 257 मिली मीटर होनी चाहिए। जबकि जून से लेकर अब तक महज 131.80 एमएम बारिश हो पाई है। आठ दिन से बारिश नहीं हो रही है। सुबह से शाम तक हो रही तीखी धूप और लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण पांच लाख किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। पंपिंगसेट के सहारे धान की रोपाई कर चुके किसान 20 से 25 दिन में ही मुरझाती फसलों को देख परेशान हैं। ज्यादातर जगहों पर किसानों ने फसल की सिंचाई शुरू कर दी है। मुजहना घाट के किसान प्रभुनाथ मिश्र ने डेढ़ एकड़ में धान की रोपाई की है। इनका कहना है कि इस साल मानसून कमजोर पड़ गया है। कभी भी झमाझम बारिश नहीं हुई है। औसतन हर साल 15 जून से जुलाई माह तक खूब बारिश होती है। इस बार ऐसा नहीं है। 28 जून के बाद बारिश शुरू हुई। धान की रोपाई पंपिंगसेट के सहारे करनी पड़ी। अभी 25 दिन भी नहीं हुए कि धान की सिंचाई करनी पड़ रही है। यही हाल अन्य किसानों का भी है।
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नहीं हुई बारिश तो पैदावार पर पड़ेगा असर
कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रजनीश ने बताया कि पांच दिन से जिले में बारिश नहीं हो रही है। अगर यही स्थिति एक सप्ताह और रही तो धान के उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि तीन से चार दिन में बारिश की संभावना बन रही है।
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जिले में खरीफ फसलों की बुवाई
फसल - रकबा (हेक्टेयर में)
धान - 131343
मक्का - 4555
बाजरा - 139
ज्वार - 55
दलहन - 4661
तिलहन - 1847
कुल योग - 112600
यहां इतनी हुई है बारिश
तहसील - बारिश
देवरिया - 43 एमएम
रूद्रपुर - 30 एमएम
भाटपाररानी - 19.2 एमएम
सलेमपुर - 14.3 एमएम
बरहज - 25.1 एमएम
कुल - 131.80 एमएम
बोले किसान-
- मैंने दो एकड़ में धान की खेती की है। रोपाई के दौरान भी लेव लगवाने के लिए पंपिंग सेट से पानी चलवाना पड़ा। अभी कुछ ही दिन बीते हैं कि बारिश न होने के कारण धान की फसल मुरझाने लगी है।
मदन मिश्र, कपरवार
मैंने करीब तीन एकड़ में धान की खेती की है। रोज हो रही तीखी धूप के कारण फसल मुरझा जा रही है। इस इलाके में डेढ़ माह के दौरान एक दिन भी झमाझम बारिश नहीं हुई। यही स्थिति रही तो लागत भी लौटना मुश्किल है।
धीरेंद्र तिवारी, परसिया तिवारी
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कोट
जिले में अभी तक बारिश 131.80 मिली मीटर हुई है, जो औसत बारिश 257 मिली मीटर से 125 मिली मीटर कम है। - एनके जाड़िया, एक्सईएन बाढ़ खंड
मौसम का बदला तेवर... हांफ रहे बिजली घर, दगा दे रहे ट्रांसफाॅर्मर
फोटो-
-तेज धूप में 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चढ़ा पारा, पांच दिन तक बारिश का पूर्वानुमान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। तेज गर्मी और उमस से लोगों की दिक्कतें दूर करने वाली बिजली ही दगा देने लगी है। शहर से गांव तक घंटों बिजली कटौती हो रही है कि लोग रात में सोने की बजाए टहलते नजर आ रहे हैं। लोकल फाल्ट और ट्रांसफाॅर्मर फुंकने से दिन में पंखे, कूलर काम नहीं कर रहे हैं। बिजली निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर में 24 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि हकीकत यह है कि लोग बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं।
शहर के न्यू काॅलोनी, देवरिया खास, भुजौली काॅलोनी, महाराणा प्रताप नगर, साकेत नगर, आईटीआई, सोंदा, परसिया, कठिनइया में शुक्रवार की शाम से बिजली गुल होने की समस्या बनी हुई है। दानोपुर में शनिवार पूरे दोपहर बिजली गुल रही। निगम के अधिकारियों के अनुसार ओवरलोड के कारण बिजली कट रही है। इनकमिंग फीडर ब्लास्ट हो जा रहे हैं। रामलीला मैदान, नाथनगर, भटवलिया उपकेंद्र मिलाकर रविवार शाम तक 35 जगहों पर विद्युत सप्लाई में गड़बड़ी आई। नाथनगर के बबलू कुमार ने बताया कि दोपहर और रात के समय हो रही बिजली कटौती से बड़ी परेशानी हो रही है। भीखमपुर रोड निवासी योगेश ने बताया कि रविवार सुबह दो घंट की कटौती हुई थी। रात में भी बिजली की आवाजाही हुई। बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता जीसी यादव ने बताया कि गर्मी बढ़ते ही बिजली की खपत बढ़ गई है। लोकल फाल्ट हो रहा है और ट्रांसफाॅर्मर फुंक जा रहे हैं।
हर रोज फुंक रहे बीस ट्रांसफार्मर, बदलने में लग रहा समय
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी के मौसम में बिजली उपकेंद्र हांफ रहे हैं। लोकल फाल्ट और हर रोज बीस ट्रांसफाॅर्मर फुंकने से बिजली व्यवस्था लड़खड़ा गई है। हालत यह है कि तय समय से ट्रांसफाॅर्मर नहीं बदला जा रहा है। ट्रांसफाॅर्मर बदलने में एक महीने से ज्यादा समय लग जा रहा है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जनपद में 234 ऐसे ट्रांसफाॅर्मर हैं, जो 15 दिन से अधिक समय से जले हुए हैं, लेकिन अभी तक बदले नहीं गए हैं।
शहर हो या देहात ट्रांसफाॅर्मर लोड नहीं झेल पा रहे हैं। पूरे जनपद में बिजली व्यवस्था लड़खड़ा गई है। जर्जर तारों के कारण आए दिन मुहल्लों की बिजली कट जा रही है। इससे निर्धारित रोस्टर हवा-हवाई साबित हो रहा है। जबकि दूसरी तरफ ट्रांसफाॅर्मर भले ही 24 और 48 घंटे में उपभोक्ता तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उपभोक्ता को ट्रांसफाॅर्मर बदलवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वर्कशाॅप में हर मरम्मत के लिए हर रोज करीब 15 से 20 ट्रांसफाॅर्मर पहुंच रहे है। इसमें से महज पांच से आठ का रिपेयरिंग हो रहा है। इस कारण ट्रांसफाॅर्मर न बदले जाने से ग्रामीण इलाके के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि शहर में नगर पालिका रोड, देवरिया खास, सीसी रोड पर कई दिनों से ट्रांसफाॅर्मर फुंके हुए हैं। यहां पर मोबाइल ट्रांसफाॅर्मर से काम चलाया जा रहा है।