देवरिया। उप्र सहकारी ग्राम विकास लिमिटेड बैंक का आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। इसके पीछे 12 सौ ऐसे खाताधारक है। जिन्होंने 16 करोड़ रुपये दबा लिया है। रुपये वापस न आने से असर माली हालत पर पड़ रहा है। तीन शाखाओं में सबसे अधिक कर्ज लेकर हड़पने वाले खाताधारक देवरिया में 682 हैं। बैंक प्रबंधन अब इन खाताधारकों से रुपये निकालने के उपाय तलाश रहा है।
सहकारी ग्राम विकास बैंक की जिले में तीन शाखाएं हैं। इसमें देवरिया, सलेमपुर और रुद्रपुर हैं। सबसे अधिक खाता देवरिया में है और 682 एनपीए है। जबकि 402 सलेमपुर और 250 के करीब खाता रुद्रपुर में है। इस बैंक की स्थिति इस समय यह है कि कई सालों से दयनीय है। करीब 16 करोड़ रुपये एनपीए खाताधारक दबाए हुए हैं जो जमा नहीं कर रहे हैं। इसको लेकर आरबीआई ने भी सख्त निर्देश दिया है। हर हाल में इन खाताधारकों से रुपये जमा कराया जाए और न देने की स्थिति में भूमि के नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसको लेकर बैंक अब तैयारी कर रहा है। बैलेंस सीट पर गौर किया जाए तो 2017 से 2022 तक बैंक मुनाफे में नहीं रहा है। इसका भी असर वित्तीय लेन-देन के रिकार्ड पर पड़ा है। दस लाख रुपये अधिक के कई ऐसे ऋणी हैं, जिनका ब्याज और मूलधन जोड़कर धनराशि काफी अधिक हो गई है।
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रिकवरी न होने से बढ़ी खाताधारकों की संख्या
देवरिया। उप्र सहकारी ग्राम विकास लिमिटेड देवरिया शाखा के प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि एनपीए (नान परफार्मेंस एसेट) खाता लगातार बढ़ने से बैंक की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ता है। जिनको लोन दिया गया है उनकी रिकवरी होनी जरूरी है। पिछले कई वर्षाें में रिकवरी न होने के कारण एनपीए खाता अधिक हो गए हैं। कोरोना काल होने के कारण भी इस पर असर पड़ा है।