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Deoria News: दो घंटे इंतजार के बाद पहुंचे 12 किसान

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विकास भवन परिसर ​स्थित प्रेणा भवन में  मोबाइल का टार्च जलाकर किसान दिवस का बैठक करते अ​धिकारी।स
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-टाॅर्च की रोशनी में पुरानी शिकायतों पर हुई चर्चा, 11 बजे किसान दिवस की बैठक के नाम पर दफ्तर छोड़ विकास भवन कैंपस पहुंच गए अफसर
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-शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना अफसरों ने, किसान दिवस से जिले के किसानों का मोह हो रहा भंग
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। किसान दिवस की बैठक बताकर 11 बजे ही अफसर दफ्तर छोड़कर विकास भवन कैंपस पहुंचे, जहां एक भी किसान नहीं पहुंचे थे। चाय की चुस्कियों के बीच दाे घंटे गपशप करने के बाद कर्मचारियों ने फोन किया तो 12 किसान पहुंचे और प्रेरणा भवन में बैठक शुरू हुई। एक माह पूर्व किसान दिवस में की गई शिकायतों के निस्तारण के सवाल पर अफसरों की बोलती बंद हो गई।
वह किसानों के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। नई योजनाओं को मोबाइल की टाॅर्च की रोशनी में कृषि उप निदेशक ने किसानों को बताया। अफसरों के इस रवैये से किसान दिवस से किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे कृषि उप निदेशक अपने कार्यालय से किसान दिवस में जाने की बात कह निकले। इनके पीछे कार्यालय के अधिकांश बाबू भी फाइल लिए चल दिए, लेकिन उस समय तक एक भी किसान नहीं पहुंचे और गांधी सभागार में सीडीओ चार ब्लॉकों की समीक्षा बैठक ले रहे थे। इसकी वजह से किसान दिवस कार्यक्रम प्रेरणा भवन में किया गया। किसानों को फोन कर कर्मचारी बुलाने में जुटे रहे और कृषि उप निदेशक, जिला कृषि अधिकारी कुछ कर्मचारियों के साथ चाय की दुकान पर बातें करते रहे।
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कार्यालय के सभी बाबू को भी बुला लिया गया और 12 किसान पहुंचे। इसकी वजह से हाल में लगी कुर्सियां भी नहीं भर पाईं। 1.10 बजे किसान दिवस की बैठक शुरू हुई। 1.24 बजे लाइट चली गई। इसकी वजह से अंधेरे में मौजूद किसानों ने अपनी समस्या रखी। मोबाइल की टाॅर्च जलाकर कृषि उप निदेशक राजेश कुमार सिंह और जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय कुमार ने किसानों की बातें कागज पर नोट की। 1.45 बजे बिजली आई। इसके बाद अफसर और किसानों ने राहत महसूस की।
सलेमपुर ब्लाॅक के किसान रमेश मिश्र ने कहा कि पिछले माह किसान दिवस की बैठक में शिकायत दर्ज कराई कि दोहनी गांव में बिजली के पोल में करंट उतरने से किसान की भैंस मर गई। उसका मुआवजा बिजली निगम दे या किसान की जमीन से पोल को हटाए। उस मामले में क्या हुआ, जिला कृषि उप निदेशक ने मौजूद बिजली के एक्सईएन वीके सिंह से जवाब पूछा, उन्होंने बताया कि पिछली बैठक में नहीं था। इस पर किसान झल्ला गए और बोले कि हम शिकायत दर्ज कराते रहेंगे और आप सुनते रहेंगे। ऐसे किसान दिवस का क्या मतलब है।
वहीं बनकटा के बंजरिया गांव निवासी मनोज पांडेय ने बताया कि तीन बार से किसान दिवस में शिकायत दर्ज करा रहा हूं कि पिछले वर्ष गेहूं का एक बोरा बीज खरीदा, लेकिन अभी तक अकाउंट में सब्सिडी नहीं पहुंची। जिला कृषि अधिकारी ने किसान से लिखित शिकायत मांगी। गौरीबाजार से आए किसान रामभवन यादव ने कहा कि डेढ़ माह से खाद, बीज के लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। अभी तक लाइसेंस नहीं मिला। ऑफिस में जाने पर कोई मिलता नहीं है, और बाबू बात नहीं करते। इसके बाद कृषि विभाग के अफसरों ने किसानों को सरकार की योजनाओं को बताया और 2.38 बजे किसान दिवस समाप्त हो गया।
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विकास भवन के गांधी सभागार में किसान दिवस का आयोजन होना था। सीडीओ की बैठक उसमें चल रही थी। इसलिए प्रेरणा भवन में किसान दिवस का आयोजन किया गया। मैं खुद बाहर खड़ा था और किसानों को फोन कर बुलवा रहे थे। किसानों की शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाई जा रही है। त्योहारों की वजह से किसानों की संख्या इस बार कम रही।
-राजेश कुमार सिंह, उप कृषि निदेशक, देवरिया

किसान दिवस के लिए नहीं है कोई चिह्नित स्थान
सितंबर में किसान दिवस की बैठक कलक्ट्रेट सभागार में हुई थी। अक्तूबर में विकास भवन के गांधी सभागार में बैठक हुई। नवंबर में प्रेरणा भवन में किसान दिवस का आयोजन किया गया। इसकी वजह से किसानों को भटकना पड़ रहा है। इसके लिए कोई स्थान चिह्नित नहीं किया गया है। किसानों का आरोप है कि इसके पहले किसान दिवस का आयोजन कलक्ट्रेट में होता था।
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किसान दिवस को अफसरों ने मजाक बना दिया है। अफसरों के झूठे आश्वासन और मनमानी की वजह से जिले के किसानों का मोह किसान दिवस से भंग हो रहा है। इसके चलते अधिकांश किसान किसान दिवस में नहीं जा रहे हैं।
-विनय कुमार सिंह, भाकियू पूर्वी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष
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किसान दिवस में शिकायत कर थक चुके हैं। समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। एक माह बाद भी दर्ज कराई गई शिकायतों का निस्तारण नहीं हो सका है। इस लिए अब किसान दिवस में आने से मन खिन्न हो रहा है।
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-रमेश मिश्रा, किसान
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किसानों की हित की बात करने वाली सरकार को अफसरों की कार्यशैली पर ध्यान देना चाहिए। किसान दिवस में बड़ी-बड़ी बात करने वाले अफसर यहां से जाने के बाद भूल जाते हैं। शिकायत के निस्तारण में रूचि नहीं ले रहे हैं।
-रामभवन यादव, किसान
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