देवरिया। रक्षाबंधन पर रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा ने रंग दिखाया। जो बहनें पैसों के अभाव में लंबा सफर तय कर भाई को राखी बांधने नहीं जा पाती थीं, वे भी इस बार भाइयों के घर जाकर उनके कलाई पर राखी बांधी। आलम यह था कि रोडवेज बसों में काफी भीड़ थी। सीट नहीं मिलने के कारण बहुत सी महिलाओं को खड़े होकर सफर तय किया। फिर भी वे खुश थी कि भला किसी सरकार ने रक्षाबंधन पर रोडवेज में यात्रा तो फ्री किया। रात दो बजे रोडवेज डिपो पर इक्का-दुक्का यात्री तो थे, लेकिन गंतव्य तक ले जाने के लिए बसें नहीं थीं। दूरदराज से आए लोग भोर होने का इंतजार कर रहे थे, ताकि बेडे़ से बसें निकले और उन्हें गंतव्य तक ले जाए। चार बजते-बजते बस स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ जुटने लगी। इसमें महिलाओं की संख्या अधिक थी। सलेमपुर में भाई को राखी बांधने जा रही रेनू ने कहा कि मुफ्त यात्रा का सफर 24 नहीं 48 घंटे को होना चाहिए था, ताकि बहने भाई के घर एक रात गुजार सकें। मम्मी के साथ बरहज जा रही सोनम ने बताया कि वह मामा के घर जा रही हैं। उसके सगे भाई नहीं हैं। हर साल मामा के बेटों यानी ममेरे भाई को राखी बांधने जाती हैं। हरियाणा से बघौचघाट में भाई को राखी बांधने आई महिला रेखा ने कहा कि यूपी सरकार ने हरियाणा का नकल किया है। वहां पर बहुत पहले से रक्षाबंधन पर मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महिलाओं के लिए रोडवेज की मुफ्त यात्रा मुसीबतों भरा रहा। अनुबंधित बसें न के बराबर सड़कों पर दौड़ रही थीं। अनुबंधित बस के चक्कर में महिलाएं प्राइवेट बसों में सवार हो जा रही थीं। ऐसे में किराये को लेकर नोकझोंक भी होती रही।