चित्रकूट। किसान की गैर इरादतन हत्या में तीन दोषियों को जिला जज ने सात साल कैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 12-12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
बरगढ़ थाने के मुरका गांव निवासी दीपक सिंह ने 20 मार्च 2022 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके पिता गिरबधारी सिंह 19 मार्च की रात खेतों में फसल की रखवाली करने गए थे। दूसरे दिन घर न लौटने पर पता लगाने के लिए भतीजा शैलेंद्र सिंह खेतों पर गया। झोपड़ी में टार्च, साफी और मोबाइल रखा थे, लेकिन गिरबधारी सिंह वहां नही थे। तलाश करने के बाद उनके खून लगे जूते और जमीन पर बिखरा खून नजर आया।
उसने शोर मचाया तो मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने खोजबीन की। कुछ देर बाद पता चला की रेलवे लाइन के पास उनका शव पड़ा था। दीपक सिंह ने हत्या करने की आशंका जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस विवेचना के दौरान पता चला कि गांव के ही बब्बू उर्फ रामपाल विश्वकर्मा, रामजतन कोल और शिवसागर सिंह पटेल जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए रात में खेतों में तार बिछाकर करंट दौड़ा देते थे। पिता इसका विरोध करते थे। इसके चलते उन लोगों ने उनको मारने के लिए करंट युक्त तार लगा दिए थे। वहां से निकलते समय गिरबधारी सिंह तार में फंस गए और उनकी मौत हो गयी।
अपराध छिपाने के लिए तीनों आरोपियों ने शव रेलवे पटरी पर फेंक दिया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। साथ ही न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद गुरुवार को सत्र न्यायाधीश विकास कुमार प्रथम ने गैर इरादतन हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के मामले में दोष सिद्ध होने पर तीनों सात-सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई।