चित्रकूट। पाकिस्तान के दो हिंदू परिवारों को आश्रय देने वाले कमलेश पटेल की जांच पड़ताल में खुफिया विभाग की टीम जुट गई है। टीम यह पता लगा रही है कि उसका चित्रकूट के किस अखाड़े से संबंध है। उसका दिल्ली किस सिलसिले में आना-जाना होता है। दस साल पहले छोटे से मकान में रहने वाले कमलेश ने गांव में बड़ा मकान कैसे बनवाया और आधुनिक सुविधाएं कहां से रुपये लाकर जुटाई है। बताया जाता है कि एक अखाड़े के महंत की फोटो लगाकर नवजात बच्चों का अनाथालय संचालित करता है, लेकिन इस अनाथालय में कोई बच्चा नहीं है। इसका कहां और कैसे संचालन हो रहा है, इसकी पड़ताल की जा रही है।
संग्रामपुर गांव निवासी कमलेश के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि कई साल पहले वह बालू और गिट्टी के काम में ठेकेदार की सामग्री बेचने में सहयोग करता था। परिवार बेहद सीधा सादा जीवन व्यतीत करता है। इधर कुछ सालों से कमलेश ने तेजी से तरक्की की है। गांव में ही कई स्थान पर संपत्ति बनाई। एक अखाड़े में आना जाना हुआ और वहां का शिष्य बनकर अनाथालय खोला। इसमें महंत की फोटो लगाकर गांव-गांव में होर्डिंग लगाई है कि लावारिस नवजातों को फेंके नहीं, उसके अनाथालय में पहुंचाएं, नाम गुप्त रखा जाएगा। इसका कार्यालय गांव में ही बनाया है, लेकिन मौके पर इसमें कोई बच्चा नहीं मिला है। इसके अलावा इसके दिल्ली आने-जाने की ठोस वजह की भी तलाश की जा रही है।