चित्रकूट। कामदगिरि पीठ परिसर में संत मदन गोपाल दास ने कहा कि ज्ञानवापी नाम से ही हिंदू धर्म का प्रतीक है। इसमें समस्त हिंदुओं का हक है। अब तक तो सब ठीक है लेकिन यदि यह हिंदुओं के हक में नहीं आया तो राम मंदिर की तरह आंदोलन करने से संत पीछे नहीं हटेंगे। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा दिलाने को जय बजरंग सेना व विश्व हिन्दू परिषद समेत संतों ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है।
मंगलवार को कामदगिरी मंदिर परिसर में बैठक में उन्होंने कहा कि राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा स्थापना के साथ ही राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराने का प्रयास होगा। अभी तक लगभग एक लाख हस्ताक्षर कराए जा चुके हैं। इसे लेकर सांसदों को पत्र लिखा जाएगा। देश के सभी सांसदों को पत्र लिखे जा रहे हैं। ताकि रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराया जाए।
जय बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन उपाध्याय ने कहा कि यह ग्रंथ हिन्दू सनातन के लिए अतिमहत्वपूर्ण है। अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय ने कहा कि महाकवि तुलसीदास का जन्म राजापुर में हुआ है। यह स्थली रमणीक है। विहिप के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी ने कहा कि सभी रामभक्त सनातन से जुडे हैं। संचालन अर्चन कुमार ने किया।