चित्रकूट। आरएसएस के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने मानव धर्म को सबसे बड़ा बताया है। कहा कि मनुष्य को मानव के साथ ही जीव जंतुओं का भी हित ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। देश में अस्थिरता का माहौल नहीं होना चाहिए। मानव ही मानव के काम आता है। देश के अन्य हिस्सों में भी जानकीकुंड अस्पताल, डिजिटल गोशाला व मंदिरों में चल रहे कार्य से प्रेरणा लेनी चाहिए।
दो दिवसीय दौरे के धर्मनगरी आए मोहन भागवत रविवार को पूरी तरह से आध्यात्मिक नजर आए। सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के संचालित रघुवीर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक कर राम-जानकी मंदिर में पूजन-अर्चन किया। परिसर में संचालित संस्कृत महाविद्यालय का भ्रमण कर छात्रों से संस्कृत में बातचीत की। उन्होंने संस्कृत की शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया। कहा कि यह देश की संस्कृति से जुड़ी भाषा है।
इसके बाद वह सद्गुरु की डिजिटल गोशाला पहुंचे। भ्रमण के बाद उन्होंने गिरि नस्ल की जमुना (गाय) और उसके बछड़े को फल और गुड़ खिलाकर पूजन किया। डीजी वेट केयर की संस्था के डॉ. आलोक वाजपेयी व गोशाला संचालक अंजनी कुमार परिहार ने गोशाला के बारे में जानकारी दी। गोशाला की देखरेख करने वाली समाजसेवी ऊषा जैन ने बताया कि यहां मौजूद सभी गोवंशों के डिजिटल कार्ड बने हैं। ऑनलाइन कंप्यूटर से सभी गोवंशों के देखरेख का काम होता है। सर संघ चालक ने इस कार्य की प्रशंसा की।
इसके बाद वह सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने रोगियों व उनके परिजनों का हाल जाना। डाक्टर व स्टाफ से बातचीत के बाद कहा कि यहां सही मायने में मानव धर्म के आधार पर मानव सेवा का कार्य होते दिख रहा है। देश भर में इन कामों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य संस्थाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने कई नेत्र रोगियों को चश्मे बांटे। इसके पूर्व उन्होंने जानकीकुंड चिकित्सालय परिसर में नये भवन के लिए भूमि पूजन भी किया। इस मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष विशदभाई मफतलाल, निदेशक डॉ. बीके जैन, डॉ. ईलेश जैन, ऋषि जैन, राजेंद्र मिश्रा आदि मौजूद रहे।