चित्रकूट। मंदाकिनी नदी इन नाविकों की रोजी-रोटी है। रोजाना रामघाट आने वाले श्रद्धालुओं को नाव पर बैठाकर नौका विहार कराना ही इनके घर का चूल्हा जलाता है। बृहस्पतिवार को भी ये सुबह से घाट पर बैठे थे। सोच रहे थे कि श्रद्धालु आएंगे और नाव चलाकर दो जून की रोटी का जुगाड़ हो जाएगा। लेकिन मंदाकिनी के उफान ने उनकी हर उम्मीद पर पानी फेर दिया। घाट वीरान, श्रद्धालु नदारद और नावें किनारे बंधी। 6 दिन से काम ठप है। जेब खाली, घर में राशन नहीं। ऐसे में नाविकों ने नाव पर ही गैस चूल्हा रख दिया। उसी पर रोटी सेंककर पेट की आग बुझाने में जुट गए।